
New Delhi नई दिल्ली : स्मार्टफोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। वीवो इंडिया लिमिटेड और डिक्सन टेक्नोलॉजी के बीच प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर को सरकार की मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद डिक्सन टेक्नोलॉजी के शेयरों में तेजी देखने को मिली और कंपनी के शेयर करीब 4 प्रतिशत तक चढ़ गए।
दोनों कंपनियों के बीच इस साझेदारी का ऐलान वर्ष 2024 में किया गया था। हालांकि, लंबे समय से इस ज्वाइंट वेंचर को सरकारी मंजूरी का इंतजार था। अब अनुमति मिलने के बाद भारत में स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इस संयुक्त उपक्रम में डिक्सन टेक्नोलॉजी की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि वीवो इंडिया के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। दोनों कंपनियां मिलकर स्मार्टफोन के लिए ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग (OEM) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उत्पादन करेंगी।
यह ज्वाइंट वेंचर शुरुआती तौर पर 5 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शुरू किया जा रहा है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन निर्माण क्षमता को बढ़ाना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है।
डिक्सन टेक्नोलॉजी भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है, जो पहले से ही कई बड़े ब्रांडों के लिए इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण करती है। वहीं, वीवो भारत के स्मार्टफोन बाजार में एक प्रमुख कंपनी है और देश में बड़ी संख्या में अपने मोबाइल फोन बेचती है।
कंपनी के प्रबंधन के मुताबिक, वीवो भारत में हर साल करीब 3.5 करोड़ स्मार्टफोन बेचती है। इस ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से दोनों कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही हैं। लक्ष्य रखा गया है कि वर्ष 2027 तक यह संयुक्त उपक्रम भारत में हर साल करीब 60 लाख स्मार्टफोन का उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगा।
इस साझेदारी को भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में स्मार्टफोन निर्माण को बढ़ावा देने से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
शेयर बाजार में भी इस खबर का सकारात्मक असर देखने को मिला। सरकार की मंजूरी की खबर सामने आने के बाद निवेशकों ने डिक्सन टेक्नोलॉजी के शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे कंपनी के शेयरों में तेजी आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी कंपनी के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को और मजबूत कर सकती है।
वीवो और डिक्सन का यह संयुक्त प्रयास भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी स्मार्टफोन उत्पादन, सप्लाई चेन विकास और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा सकती है।





