
नई दिल्ली: पिछले सत्र में तेज गिरावट दर्ज करने के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया। बाजार में मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संभावित संघर्षविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0003 GMT तक 21 सेंट यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 95.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह इससे पहले के सत्र में 2.84 प्रतिशत की गिरावट के बाद दर्ज किया गया बदलाव है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी गुरुवार को 3.1 प्रतिशत गिरने के बाद 10 सेंट या 0.11 प्रतिशत फिसलकर 92.94 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
हालांकि, दोनों प्रमुख क्रूड बेंचमार्क इस सप्ताह अब तक सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं और तीन हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहे हैं। WTI में इस सप्ताह अब तक 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। यह बढ़त मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर चिंताओं के कारण देखने को मिली है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। हिज़्बुल्लाह द्वारा लेबनान में नए सीज़फायर को खारिज किए जाने के बाद अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफिक में कमी भी बाजार की चिंता का एक बड़ा कारण है। यह वही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग एक-चौथाई तेल का परिवहन होता है। किसी भी प्रकार की बाधा इस मार्ग में वैश्विक आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकती है।
एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल के भंडार में गिरावट की आशंका बनी हुई है। यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाली तीसरी तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखी जा सकती है।
फिलहाल बाजार की नजर मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक घटनाक्रम और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले प्रभावों पर टिकी हुई है। निवेशक किसी भी नए संकेत के इंतजार में सतर्कता बरत रहे हैं, जिससे कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव फिलहाल सीमित बना हुआ है।





