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कच्चे तेल की कीमतों में 2% से अधिक गिरावट, ट्रंप के बयान के बाद बाजार में नरमी

Kavita2
19 May 2026 11:54 AM IST
कच्चे तेल की कीमतों में 2% से अधिक गिरावट, ट्रंप के बयान के बाद बाजार में नरमी
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Business बिजनेस: एशियाई बाजारों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क्स में यह गिरावट 2 प्रतिशत से अधिक रही, जिससे ऊर्जा बाजार में हलचल देखी गई। गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित एक हमले को रोकने की बात कही और मध्य-पूर्व में तनाव कम करने तथा बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का संकेत दिया।

ट्रंप के इस बयान के बाद भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी की उम्मीद बढ़ी, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति जोखिम में कमी को ध्यान में रखते हुए तेल बाजार में बिकवाली शुरू कर दी।

जुलाई डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 3.01 डॉलर यानी 2.7 प्रतिशत गिरकर 109.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं जून डिलीवरी के लिए अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.38 डॉलर यानी 1.3 प्रतिशत गिरकर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में दर्ज मजबूत बढ़त के बाद आई है, जब दोनों बेंचमार्क ने क्रमशः 5 मई और 30 अप्रैल के बाद अपने उच्चतम स्तर को छुआ था।

इसके अलावा, जून WTI अनुबंध मंगलवार को समाप्त होने वाला है, जिससे बाजार में अतिरिक्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सबसे अधिक सक्रिय जुलाई WTI अनुबंध भी 2.06 डॉलर यानी 2 प्रतिशत गिरकर 102.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

विश्लेषकों का कहना है कि तेल बाजार में हालिया तेजी मुख्य रूप से मध्य-पूर्व में तनाव और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितताओं के कारण थी। लेकिन जैसे ही कूटनीतिक समाधान की संभावना बढ़ी, निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक मध्य-पूर्व की राजनीतिक स्थिति और वैश्विक मांग के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। यदि तनाव में और कमी आती है तो कीमतों पर और दबाव देखा जा सकता है, जबकि किसी भी नए तनाव की स्थिति में कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।

इस बीच, वैश्विक बाजारों में निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर करीबी नजर रखी जा रही है।

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