
Business बिजनेस: टेक दिग्गज एप्पल चीन की कंपनी चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज (CXMT) से मेमोरी चिप्स खरीदने की मंजूरी हासिल करने के लिए ट्रंप प्रशासन से लॉबिंग कर रहा है। यह कंपनी अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की ब्लैकलिस्ट में शामिल है, जिसके चलते इससे जुड़े किसी भी व्यापारिक सौदे पर सख्त प्रतिबंध और सुरक्षा जांच लागू होती है।
रिपोर्ट में बिना नाम बताए सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आईफोन निर्माता एप्पल का यह कदम मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को कम करने के प्रयास का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर चिप्स की कीमतों में तेजी आने से एप्पल की सप्लाई चेन और उत्पादन लागत पर असर पड़ रहा है, जिसके चलते कंपनी वैकल्पिक और सस्ते सप्लायर विकल्पों की तलाश में है।
सूत्रों के अनुसार, एप्पल ने व्हाइट हाउस से इस मामले में विशेष अनुमति या मंजूरी के लिए बातचीत शुरू की है, ताकि वह CXMT से सीमित या नियंत्रित स्तर पर मेमोरी चिप्स की खरीद कर सके। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस बातचीत में कोई औपचारिक प्रस्ताव रखा गया है या नहीं।
चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज चीन की एक प्रमुख मेमोरी चिप निर्माता कंपनी है, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसे संवेदनशील सूची में रखा गया है। पेंटागन द्वारा ब्लैकलिस्ट में डाले जाने के बाद इस कंपनी के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार अमेरिकी सुरक्षा नीतियों के तहत जटिल और प्रतिबंधित माना जाता है।
यह भी कहा गया है कि एप्पल का यह कदम अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के सामने बढ़ती चुनौती को उजागर करता है, जहां एक तरफ मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर चीन की चिप कंपनियों पर वाशिंगटन द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिबंध भी बाधा बन रहे हैं।
व्हाइट हाउस, एप्पल और CXMT ने इस रिपोर्ट पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। रॉयटर्स की ओर से संपर्क किए जाने के बावजूद किसी भी पक्ष ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे इस मामले में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एप्पल को इस तरह की अनुमति मिलती है, तो यह अमेरिका की तकनीकी और सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। वहीं यदि अनुमति नहीं दी जाती है, तो कंपनियों को वैकल्पिक सप्लायर और उच्च लागत वाले विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
यह मामला वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है, जहां तकनीकी निर्भरता, व्यापारिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियां एक-दूसरे से टकरा रही हैं। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे तकनीकी तनाव का असर अब सीधे तौर पर बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन और उत्पादन लागत पर दिखाई दे रहा है।
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, मेमोरी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर स्मार्टफोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर सेक्टर में। ऐसे में सप्लाई बाधाओं और राजनीतिक प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कुल मिलाकर, एप्पल द्वारा CXMT से चिप खरीदने की मंजूरी के लिए की जा रही कथित लॉबिंग न केवल कंपनी की रणनीतिक जरूरतों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक तकनीकी उद्योग में चल रहे भू-राजनीतिक और आर्थिक दबावों को भी उजागर करती है।





