
BUSINESS: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड की राजकीय यात्रा पर जा रहे हैं। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत-न्यूजीलैंड संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को लेकर बड़ी उम्मीदें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत 57 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म किया जा सकता है, जिससे दोनों देशों के कारोबारियों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन अब दोनों देश आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की तैयारी में हैं। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर उपलब्ध कराना है।
भारत के लिए यह समझौता कई क्षेत्रों में संभावनाओं के नए रास्ते खोल सकता है। कृषि और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय मसाले, चाय, कॉफी, प्रोसेस्ड फूड और ऑर्गेनिक उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। वहीं, भारतीय आईटी कंपनियों, डिजिटल सेवाओं और फार्मास्यूटिकल सेक्टर को भी नए बाजार मिलने की उम्मीद है। अगर 57 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क हटता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड में अपने उत्पाद बेचने की लागत कम हो सकती है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार आसान होने से दोनों देशों के बीच निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
वहीं न्यूजीलैंड को भी भारत जैसे बड़े बाजार से फायदा मिलने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड डेयरी उत्पाद, फल, मीट, वाइन और कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए जाना जाता है। आयात शुल्क में कमी आने से इन उत्पादों की भारतीय बाजार में पहुंच आसान हो सकती है। इस व्यापार समझौते का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। शुल्क कम होने से कुछ विदेशी उत्पादों की कीमतों में कमी आ सकती है। इसके अलावा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कंपनियां बेहतर गुणवत्ता और किफायती कीमतों पर उत्पाद उपलब्ध कराने की कोशिश कर सकती हैं।
हालांकि इस समझौते को लेकर भारतीय किसानों की चिंताएं भी सामने आ सकती हैं। कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार आमतौर पर संवेदनशील उत्पादों को विशेष सुरक्षा देती है। ऐसे में संभावना है कि सभी कृषि उत्पादों पर टैक्स में छूट नहीं दी जाएगी और घरेलू किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान व्यापार के अलावा रक्षा सहयोग, शिक्षा, निवेश, स्टार्टअप, कौशल विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। ऑकलैंड में भारतीय समुदाय से प्रधानमंत्री का संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में यह यात्रा केवल आर्थिक नहीं बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। भारतीय निर्यातकों को नया बाजार मिलेगा, न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।





