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भारत में LPG साइबर घोटालों में उछाल: फर्जी लिंक, WhatsApp APK मैलवेयर और UPI फ्रॉड का खुलासा

Shantanu Roy
21 March 2026 11:31 PM IST
LPG scam
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LPG scam

भारत में LPG स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां ठग फर्जी बुकिंग लिंक, WhatsApp APK मैलवेयर और UPI बायपास तकनीक के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

भारत में LPG से जुड़े साइबर घोटालों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। देशभर में अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि ठग गैस की कथित कमी की अफवाह फैलाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि LPG की कोई वास्तविक कमी नहीं है, लेकिन डर और जल्दबाज़ी का माहौल बनाकर लोगों को फर्जी मैसेज, कॉल और लिंक के जरिए ठगा जा रहा है।

महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों से सामने आए मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है। लोगों को SMS और WhatsApp पर मैसेज मिलते हैं जिनमें LPG बुकिंग फेल, पेमेंट एरर या कनेक्शन बंद होने की चेतावनी दी जाती है। इन मैसेज में फर्जी वेबसाइट लिंक या नकली कस्टमर केयर नंबर शामिल होते हैं।

साइबर सुरक्षा कंपनी TraceX Labs के अनुसार, ये हमले अब केवल फिशिंग तक सीमित नहीं हैं। हमलावर ट्रोजन से संक्रमित APK फाइल्स फैला रहे हैं जिनमें Remote Access Trojan (RAT) छिपा होता है। इंस्टॉल होते ही ये ऐप्स यूजर के फोन का कंट्रोल ले लेते हैं और OTP, मैसेज तथा बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना लेते हैं।

इसके अलावा हमलावर एडवांस UPI बायपास तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिना यूजर की अनुमति के ट्रांजैक्शन हो जाता है। कई मामलों में पीड़ित को पैसे कटने का पता तब चलता है जब काफी नुकसान हो चुका होता है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यह मैलवेयर संक्रमित फोन से खुद-ब-खुद कॉन्टैक्ट्स को फर्जी लिंक भेजता है, जिससे यह स्कैम तेजी से फैलता है। चूंकि मैसेज जान-पहचान वालों के नंबर से आता है, लोग आसानी से उस पर भरोसा कर लेते हैं।

ठग नकली LPG वेबसाइट्स, QR कोड कैशबैक स्कैम और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स का भी उपयोग कर रहे हैं। लोग सिलेंडर बुकिंग या KYC अपडेट करने के नाम पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर देते हैं।

बचाव के लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि केवल आधिकारिक LPG प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें, किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और APK फाइल डाउनलोड करने से बचें। OTP, UPI PIN और बैंकिंग डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें।

यदि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का संदेह हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे साइबर घोटालों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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