काहिरा: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मिस्र यात्रा ने दुनिया का ध्यान खींचा है। करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे चिनफिंग ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ व्यापक बातचीत की। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग से लेकर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, व्यापार, सप्लाई चेन और बुनियादी ढांचे तक कई क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई। यात्रा के दौरान 20 से अधिक सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। चिनफिंग की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका की भूमिका और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। चीन पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते तेजी से मजबूत कर रहा है। मिस्र को इस रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि स्वेज नहर वैश्विक व्यापार का प्रमुख मार्ग है और मिस्र अरब तथा अफ्रीकी दुनिया में भी महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका निभाता है।

10 साल बाद मिस्र पहुंचे चिनफिंग
शी चिनफिंग 1 सितंबर को मिस्र पहुंचे थे। यह 2016 के बाद उनकी पहली मिस्र यात्रा थी। इस वर्ष चीन और मिस्र अपने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं। काहिरा में राष्ट्रपति सीसी ने चिनफिंग का औपचारिक स्वागत किया और उनके सम्मान में 21 तोपों की सलामी दी गई। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दा रही। चिनफिंग ने क्षेत्रीय देशों से संवाद और सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए पश्चिम एशिया के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था की बात कही।
पश्चिम एशिया के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था का प्रस्ताव
चिनफिंग ने चार बिंदुओं पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के देशों को अपनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक भूमिका निभानी चाहिए और बाहरी हस्तक्षेप से बचते हुए आपसी संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी पश्चिम एशिया की समस्याओं के केंद्र में बताया। इसके साथ चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा में क्षेत्रीय देशों के साथ काम करने की इच्छा जताई। मिस्र के राष्ट्रपति सीसी ने भी क्षेत्रीय तनाव कम करने और राजनीतिक तथा कूटनीतिक तरीकों से विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने की बात कही।
20 से ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर
चिनफिंग की यात्रा का आर्थिक पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। दोनों देशों ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार, औद्योगिक और सप्लाई चेन सहयोग सहित कई क्षेत्रों में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी समझौते हुए। दोनों पक्षों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए संयुक्त बयान जारी किया।
स्वेज नहर पर चीन की नजर
चीन और मिस्र ने स्वेज नहर आर्थिक क्षेत्र में बने चीन-मिस्र औद्योगिक क्षेत्र के तीसरे चरण को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इस औद्योगिक क्षेत्र में पहले से करीब 200 कंपनियां मौजूद हैं और अरबों डॉलर का निवेश हो चुका है। स्वेज नहर चीन के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इसके आसपास चीन की आर्थिक मौजूदगी बढ़ना बीजिंग की दीर्घकालिक वैश्विक व्यापार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रक्षा सहयोग भी बढ़ा
चीन और मिस्र के रिश्ते अब केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बढ़ रहा है। मिस्र और चीन संयुक्त सैन्य अभ्यास भी कर चुके हैं। दोनों नेताओं की बातचीत में आतंकवाद से मुकाबला, अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ सहयोग और सैन्य-सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। मिस्र लंबे समय से अमेरिका का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार और अमेरिकी सैन्य सहायता का प्रमुख प्राप्तकर्ता रहा है। इसके बावजूद काहिरा चीन, रूस और यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को भी विस्तार दे रहा है। इसे मिस्र की विभिन्न वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति के रूप में देखा जा रहा है।
क्या अमेरिका के प्रभाव को चुनौती दे रहा चीन?
चिनफिंग की यात्रा को सीधे अमेरिका को चुनौती देने वाली यात्रा कहना विश्लेषणात्मक निष्कर्ष होगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि चीन पश्चिम एशिया में अपनी आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा भूमिका का विस्तार कर रहा है। मिस्र जैसे महत्वपूर्ण अमेरिकी साझेदार के साथ चीन के बढ़ते संबंध इस बदलाव को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। चीन खुद को निवेश, बुनियादी ढांचे और व्यापार के साथ राजनीतिक तथा सुरक्षा सहयोग देने वाले दीर्घकालिक साझेदार के रूप में पेश कर रहा है। वहीं मिस्र भी किसी एक वैश्विक शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है।
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