ट्रंप की शक्तियां सीमित करने का प्रस्ताव गिरा, सीनेट में हुई वोटिंग
ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर सीनेट में मतदान
वॉशिंगटन: ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश को अमेरिकी सीनेट में झटका लगा है। गुरुवार को सीनेट ने वॉर पावर्स प्रस्ताव को 49-50 के बेहद करीबी अंतर से खारिज कर दिया। हालांकि मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सीनेटरों ने अपनी पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया।
प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति को ईरान या उसकी सरकार और सेना के खिलाफ अमेरिकी सशस्त्र बलों को सैन्य कार्रवाई से हटाने का निर्देश देना था। प्रस्ताव के मुताबिक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस की ओर से युद्ध की स्पष्ट घोषणा या सैन्य बल के इस्तेमाल की विशेष अनुमति जरूरी होती। यह प्रस्ताव बड़े पैमाने पर प्रतीकात्मक था और इससे पहले प्रतिनिधि सभा में भी पारित हो चुका था।
मतदान में रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, रैंड पॉल और थॉम टिलिस ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी पार्टी के अधिकांश सदस्यों से अलग वोट दिया। खास बात यह रही कि टिलिस ने इस मुद्दे पर पहली बार प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन ने अपनी पार्टी से अलग जाकर प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।
यह मतदान ऐसे समय हुआ है जब ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर कांग्रेस के भीतर बहस तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सांसद लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं कि लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस की स्पष्ट भूमिका होनी चाहिए। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन और उसके समर्थकों का रुख रहा है कि राष्ट्रपति के पास अमेरिकी हितों और सुरक्षा के लिए जरूरी सैन्य कदम उठाने का अधिकार है।
इससे पहले जून में सीनेट ने इसी तरह के एक वॉर पावर्स प्रस्ताव को 50-48 से मंजूरी दी थी। उस समय भी चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने डेमोक्रेट्स के साथ मतदान किया था। इसके बाद जुलाई में एक अन्य प्रस्ताव को सीनेट में आगे बढ़ने से रोक दिया गया था। ताजा मतदान ने एक बार फिर दिखाया है कि ईरान युद्ध और राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को लेकर अमेरिकी संसद में मतभेद बने हुए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने प्रस्ताव के समर्थन में मतदान से पहले कहा कि प्रशासन को सैन्य अभियान के संबंध में कांग्रेस को अधिक जानकारी देनी चाहिए। वहीं सीनेट में प्रस्ताव का विरोध करने वाले सांसदों का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करना उचित नहीं होगा।
ईरान संघर्ष का आर्थिक असर भी अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध पर हो रहे खर्च को लेकर कई सांसद सवाल उठा रहे हैं। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। फिलहाल 49-50 के मतदान के बाद ताजा प्रस्ताव सीनेट से पारित नहीं हो सका और ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर कांग्रेस तथा व्हाइट हाउस के बीच अधिकारों की बहस जारी है।