Washington वॉशिंगटन: फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के एक दिन बाद, अमेरिका के एक प्रभावशाली सीनेटर ने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करना चाहिए, न कि कमजोर। उन्होंने तर्क दिया कि दंडात्मक टैरिफ (punitive tariffs) ने एक अहम रणनीतिक साझेदार को गलत संकेत भेजा है।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई मुलाकात पर एक सवाल के जवाब में सीनेटर मार्क वार्नर ने ​​कहा, "मुझे अभी बैठक की पूरी जानकारी नहीं मिली है। मुझे उम्मीद है कि इससे रिश्ते बेहतर होंगे।"
वर्जीनिया के डेमोक्रेट नेता ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध बेहद अहम हैं और इस बात पर जोर दिया कि वॉशिंगटन को इस रिश्ते में निवेश जारी रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुझे सीनेट में इंडिया कॉकस का सह-अध्यक्ष होने पर गर्व है। मुझे लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध असाधारण रूप से महत्वपूर्ण हैं।"
वार्नर ने तर्क दिया कि अमेरिका की पिछली सरकारों ने सालों तक भारत को वॉशिंगटन के साथ सहयोग बढ़ाने और रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
उन्होंने कहा, "पिछले 25 सालों से, हमने भारत को रूस पर निर्भरता से दूर करने और एक साथी लोकतंत्र के तौर पर हमारे साथ गठबंधन की ओर लाने की कोशिश की है।"
उन्होंने 'क्वाड' (Quad) जैसी पहलों का जिक्र किया, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है।
सीनेटर ने कहा कि उन्हें पिछले साल भारतीय सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करने के ट्रंप के फैसले पर हैरानी हुई थी।
वार्नर ने कहा, "मेरे लिए यह बात समझ से परे थी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मनमाने ढंग से भारत पर टैरिफ बढ़ाकर दुनिया में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक कर दिया था।"
इस वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सीनेटर का मानना ​​था कि ऐसे कदमों से एशिया में अमेरिका के व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों को नुकसान पहुंचने का खतरा था, खासकर ऐसे समय में जब वॉशिंगटन चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने और मॉस्को पर भारत की ऐतिहासिक निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हम भारत को चीन और रूस से दूर करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उस फैसले ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद अमेरिका के साथ साझेदारी करना हमारे लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं है।"
वार्नर ने कहा कि वह पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत की विस्तृत जानकारी लेना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों सरकारों के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह 21वीं सदी के सबसे अहम दो-तीन जियोपॉलिटिकल रिश्तों में से एक है। और हमें इस रिश्ते को मज़बूत करने की ज़रूरत है, कमज़ोर करने की नहीं।"
सीनेटर की यह टिप्पणी फ्रांस में अंतरराष्ट्रीय बैठकों के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाक़ात के एक दिन बाद आई है, जिसमें व्यापार, रक्षा सहयोग और व्यापक रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और अमेरिका ने रक्षा और अहम टेक्नोलॉजी से लेकर ऊर्जा, शिक्षा और सप्लाई-चेन की मज़बूती जैसे कई क्षेत्रों में अपने सहयोग को लगातार बढ़ाया है।
पिछले दो दशकों में, भारत-अमेरिका संबंध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में वॉशिंगटन की सबसे अहम साझेदारियों में से एक बन गए हैं। दोनों देशों ने बड़े रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं और उभरती टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अहम खनिजों के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया है।
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