ट्रंप ने ईरान पर और हमले करने का लिया संकल्प

Update: 2026-08-01 03:05 GMT
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रखेगा, जब तक तेहरान अमेरिकी सेनाओं के लिए खतरा बना रहेगा या परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत सफल होगी, इसको लेकर उनका भरोसा कम हुआ है।
कैंप डेविड में पहली बार टीवी पर लाइव दिखाई गई कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि जारी राजनयिक बातचीत के बावजूद प्रशासन ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। आने वाले हफ्तों में क्या उम्मीद की जाए, इस सवाल पर ट्रंप ने कहा, "हम उन पर जोरदार प्रहार करेंगे और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब वे इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।"
ट्रंप ने कहा, "उनके (ईरान) पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे और वे परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकते। अगर ऐसा होता, तो अब तक मध्य पूर्व पूरी तरह तबाह हो चुका होता।"
राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को भारी सैन्य नुकसान हुआ है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उसके पास अभी भी सीमित क्षमताएं बची हुई हैं। उन्होंने कहा, "उनके पास न तो नेवी है, न एयर फोर्स और न ही एंटी-एयरक्राफ़्ट सिस्टम। इसका मतलब यह नहीं है कि उनमें कोई क्षमता नहीं है। उनमें कुछ क्षमता है, लेकिन बहुत कम।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने अपना अभियान तेज कर दिया है, तो ट्रंप ने जवाब दिया, "हमने पहले ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। उनके पास 159 जहाज थे। यह उनकी पूरी नेवी यही थी। उनकी पूरी नेवी अब समुद्र की तलहटी में पड़ी है। मैं इसे ही बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई कहूंगा। उनके पास 200 हवाई जहाज थे, वे सभी नष्ट हो गए।"
लगातार बातचीत के बावजूद, ट्रंप ने बातचीत में तेहरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई राजनयिक समझौता अभी भी संभव है, तो उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ऐसा हो सकता है। मेरा मतलब है, उन पर से मेरा भरोसा कम हो रहा है क्योंकि वे झूठ बोलते हैं और बातों को गलत तरीके से पेश करते हैं।"
उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान ईरान द्वारा मिसाइलें दागने से बातचीत की प्रक्रिया कमजोर हुई है। ट्रंप ने कहा, "मुझे पीट का फोन आया कि उन्होंने जॉर्डन में हमारे एक बेस पर पांच मिसाइलें दागी हैं। अमेरिकी सेना ने उन पांचों मिसाइलों को रोक दिया।"
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को हमास के हथियार छोड़ने के प्रस्तावित समझौते में हुई प्रगति से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, "तो इजराइल के साथ हमारी एक समझ बनी है। इजराइल इससे बहुत खुश है। किसी ने नहीं सोचा था कि हमास से हथियार वापस लेना संभव होगा। इससे पता चलता है कि ईरान के मामले में हमें कितनी कामयाबी मिल रही है। क्योंकि अगर आप चार-पांच महीने पीछे मुड़कर देखें, तो ऐसी डील होना नामुमकिन था।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकियों को ईरान के साथ और टकराव की उम्मीद करनी चाहिए, तो ट्रंप ने कहा कि कुछ और टकराव हो सकता है। उन्होंने कहा, "थोड़ा-बहुत। वे कमजोर पड़ जाएंगे। हो सकता है कि अभी वे थोड़े मजबूत हों, लेकिन वे कमजोर पड़ जाएंगे और फिर उनका असर खत्म हो जाएगा। आपको हमेशा सतर्क रहना होगा।"
ट्रंप ने कहा कि प्रशासन यूक्रेन को अमेरिका के एडवांस्ड हथियार - जैसे पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और टॉमहॉक मिसाइलें देने के बारे में बातचीत कर रहा है, लेकिन ऐसी टेक्नोलॉजी बहुत सावधानी से शेयर की जाएगी क्योंकि इसकी स्ट्रैटेजिक अहमियत है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से जुड़े एक और सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि इस टकराव को खत्म करने के लिए मॉस्को और कीव को ही आखिरकार समझौता करना होगा। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों को कुछ समझौते करने होंगे। हर महीने 25,000 युवा अपनी जान गंवा रहे हैं।"
यह बातचीत तब हुई जब ट्रंप ने मैरीलैंड में अपनी कैबिनेट की बैठक बुलाई। व्हाइट हाउस ने इसे कैंप डेविड में होने वाली पहली ऐसी कैबिनेट बैठक बताया जिसका सीधा प्रसारण टीवी पर किया गया। पत्रकारों द्वारा ईरान, मध्य पूर्व, यूक्रेन और अन्य मुद्दों पर राष्ट्रपति से सवाल पूछने से पहले, कैबिनेट सदस्यों ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विदेश नीति और घरेलू प्राथमिकताओं पर प्रशासन का रुख स्पष्ट किया।
ट्रंप का हमेशा से यह कहना रहा है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने अपनी ईरान नीति के तीन मुख्य आधार बनाए हैं, आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य दबाव और कूटनीति। उनके प्रशासन ने तेहरान के सैन्य और वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाते हुए इजराइल को शामिल करके क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं को बढ़ाने की कोशिश भी की है।
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