Trump के 'जवाबी टैरिफ' पर दुनियाभर के नेताओं की प्रतिक्रिया

Update: 2025-04-03 07:32 GMT

वॉशिंगटन/लंदन/नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए जवाबी टैरिफ (Reciprocal Tariffs) प्रस्ताव ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर वे दूसरी बार राष्ट्रपति बनते हैं, तो अमेरिका के खिलाफ अनुचित व्यापार व्यवहार करने वाले देशों पर 26% या उससे अधिक आयात शुल्क लगाया जाएगा। इस फैसले से अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

दुनिया भर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं:

1. यूरोपीय यूनियन (EU): "अमेरिका और यूरोप दोनों को होगा नुकसान"

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा,

"इस तरह के टैरिफ से सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। हमें संरक्षणवाद की बजाय सहयोग पर ध्यान देना चाहिए।"

2. ब्रिटेन: "वैश्विक व्यापार पर खतरा"

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा,

"टैरिफ बढ़ाने से मुक्त व्यापार बाधित होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। हमें नए व्यापार युद्ध से बचना चाहिए।"

3. भारत: "हम जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार"

भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,

"अगर अमेरिका भारत के खिलाफ ऐसे टैरिफ लगाता है, तो भारत भी आवश्यक जवाबी कदम उठाएगा, जैसे कि 2019 में किया गया था।"

भारत से अमेरिका को स्टील, फार्मा और ऑटोमोबाइल निर्यात पर असर पड़ सकता है।

4. चीन: "अमेरिका को ही सबसे ज्यादा नुकसान"

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा,

"अमेरिका की यह नीति उसकी खुद की कंपनियों और उपभोक्ताओं को ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी। ट्रंप की रणनीति दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है।"

5. अमेरिका: "लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश"

अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा,

"यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए विनाशकारी होगा।"

अमेरिका और यूरोप पर असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप के इस फैसले से

अमेरिका-यूरोप के व्यापारिक संबंध खराब हो सकते हैं।

महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि कंपनियां अतिरिक्त टैरिफ की वजह से कीमतें बढ़ा सकती हैं।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, जिससे स्टील, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सेक्टर को झटका लगेगा।

निष्कर्ष

ट्रंप की जवाबी टैरिफ नीति से न केवल यूरोप, चीन और भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों को नुकसान होगा, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों को भी झटका लगेगा। अगर यह नीति लागू हुई, तो दुनिया भर में नए व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकती है।

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