अंतरराष्ट्रीय अपराध में AI का बढ़ता इस्तेमाल, UN अलर्ट

Update: 2026-07-21 14:40 GMT

वर्ल्ड: संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अपराधों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड संचार तकनीक का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर फैला रहे हैं। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से अपराधी ऑनलाइन ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग, मानव तस्करी, ड्रग्स तस्करी और अन्य संगठित अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पहले जो आपराधिक नेटवर्क केवल दक्षिण-पूर्व एशिया तक सीमित थे, वे अब दुनिया के कई देशों में अपनी पहुंच बना चुके हैं। अपराधी गिरोह तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल नए लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं, बल्कि पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए भी अत्याधुनिक तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑनलाइन ठगी अब वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाले अपराधों में शामिल हो गई है। अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025 में ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारण दुनिया को करीब 88.3 अरब डॉलर से लेकर 114.1 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। अपराधी फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल फ्रॉड, फिशिंग मैसेज और नकली पहचान के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।

UNODC के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपराधियों के लिए एक नया हथियार बन गया है। जनरेटिव AI की मदद से अपराधी बेहद भरोसेमंद फर्जी संदेश तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा रियल टाइम डीपफेक वीडियो और आवाज की नकल करने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दिया जा रहा है। इससे साइबर अपराधों की पहचान करना पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो गया है।

रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई स्कैम सेंटर अब बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के अवैध कारोबार का केंद्र बनते जा रहे हैं। AI तकनीक के जरिए बच्चों की फर्जी अश्लील तस्वीरें तैयार करने और उनका गलत इस्तेमाल करने के मामले बढ़ रहे हैं।

UNODC के शोधकर्ता इंशिक सिम ने बताया कि AI आधारित डीपफेक, मैलवेयर और अन्य डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसी गतिविधियों में किया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और जुए के प्लेटफॉर्म भी बच्चों और किशोरों के लिए नए खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं।

रिपोर्ट में मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर भी चिंता जताई गई है। अनुमान के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया और आसपास के क्षेत्रों में ड्रग्स का अवैध कारोबार करीब 109 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। अपराधी गिरोह नए रास्तों और छद्म तरीकों से नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नेटवर्क वन्यजीव तस्करी और छोटे हथियारों के अवैध कारोबार में भी सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अपराधियों ने तकनीक और वित्तीय माध्यमों को जोड़कर एक नया क्रिमिनल सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। इसमें क्रिप्टोकरेंसी, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। अपराधी कई भाषाओं में फर्जी अभियान चलाकर अलग-अलग देशों के लोगों को निशाना बना रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा। साइबर सुरक्षा मजबूत करने, AI के दुरुपयोग को रोकने और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए साझा रणनीति बनाना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ उसके गलत उपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

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