काठमांडू : नेपाल के प्रसिद्ध मनास्लु पर्वत पर पर्वतारोहण अभियान के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। मनास्लु के कैंप-3 इलाके में आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से भारतवंशी पर्वतारोही ध्रुव ज्योति गुहा और उनके नेपाली गाइड की मौत हो गई। इस घटना के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर है। बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद दोनों के शव बर्फ के नीचे से बरामद किए। हादसा उस समय हुआ जब ध्रुव ज्योति गुहा और नेपाली गाइड ऊंचाई वाले कैंप की ओर बढ़ रहे थे। मौसम खराब होने के बावजूद दोनों पर्वतारोही अभियान को आगे बढ़ा रहे थे। इसी दौरान कैंप-3 के पास अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा और दोनों इसकी चपेट में आ गए।

हिमस्खलन इतना तेज था कि आसपास मौजूद अन्य पर्वतारोहियों को भी सुरक्षित स्थान पर लौटना पड़ा। अभियान दल के कुछ सदस्यों ने स्थिति को देखते हुए कैंप-2 से वापस लौटने का फैसला किया, जिससे उनकी जान बच गई। घटना के बाद राहत और बचाव टीमों को सक्रिय किया गया और लापता पर्वतारोहियों की तलाश शुरू की गई।
कई फीट बर्फ के नीचे दबे मिले शव
रेस्क्यू टीम ने कई घंटों तक चले अभियान के बाद दोनों पर्वतारोहियों को खोज निकाला। बताया गया कि दोनों के शव कई फीट बर्फ के नीचे दबे हुए थे। पर्वतारोहण कंपनी और स्थानीय प्रशासन की मदद से शवों को नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। ध्रुव ज्योति गुहा भारतवंशी पर्वतारोही थे और विदेश में रहते थे। उन्हें ऊंची पर्वत चोटियों पर चढ़ाई का अनुभव था। वह मनास्लु की चोटी को फतह करने के अभियान का हिस्सा बने थे। उनके साथ नेपाली गाइड भी अभियान में शामिल थे, जो पर्वतारोहियों को कठिन रास्तों और मौसम की परिस्थितियों में मार्गदर्शन देते हैं।
मनास्लु पर्वत पर बढ़ते खतरे
माउंट मनास्लु नेपाल की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में से एक है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 8,163 मीटर है। यहां अचानक बदलता मौसम, तेज बर्फीले तूफान और हिमस्खलन पर्वतारोहियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों से पर्वतारोही मनास्लु की चढ़ाई के लिए नेपाल पहुंचते हैं। हालांकि, खराब मौसम और जोखिम भरे हालात के कारण कई बार अभियान के दौरान दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
पर्वतारोहण समुदाय में शोक
ध्रुव ज्योति गुहा और नेपाली गाइड की मौत की खबर सामने आने के बाद पर्वतारोहण समुदाय में दुख का माहौल है। साथी पर्वतारोहियों ने इस हादसे पर शोक जताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की सटीक जानकारी और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है। मनास्लु हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतारोहण के जोखिम को सामने ला दिया है। प्रशासन और अभियान दल अब आगे की कार्रवाई में जुटे हैं।

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