12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में ब्राजील के सीनेटर इराजा सिल्वेस्ट्रे फिल्हो का बड़ा बयान
नई दिल्ली। भारत में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में ब्राजील के सीनेटर इराजा सिल्वेस्ट्रे फिल्हो ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को ऐसी वैश्विक व्यवस्था की सख्त जरूरत है, जो सभी देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक संतुलित, समावेशी और न्यायसंगत हो। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच संसदीय सहयोग बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई।
वैश्विक व्यवस्था को नई दिशा देने की जरूरत
ब्राजील के सीनेटर इराजा सिल्वेस्ट्रे फिल्हो ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में वैश्विक संस्थाओं और बहुपक्षीय मंचों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में ब्रिक्स जैसे मंचों का योगदान आवश्यक है। दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें विभिन्न देशों की भागीदारी सुनिश्चित हो और विकासशील देशों की चिंताओं को भी उचित महत्व मिले।उनके बयान का प्रमुख संदेश अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद को मजबूत करना रहा।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स संसदीय फोरम सदस्य देशों के सांसदों और प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। इसके माध्यम से विभिन्न देशों की संसदीय व्यवस्थाओं, नीतिगत अनुभवों और विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाती है।सीनेटर फिल्हो ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए देशों को आपसी संवाद और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।ब्रिक्स मंच के जरिए सदस्य देश आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, सतत विकास और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं।
विकासशील देशों की आवाज को मिले उचित प्रतिनिधित्व
ब्रिक्स संसदीय फोरम में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार एक महत्वपूर्ण विषय है। विकासशील देशों का मानना रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए।इस संदर्भ में ब्राजील के सीनेटर का वैश्विक व्यवस्था को नई दिशा देने संबंधी बयान महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ने से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की साझा चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के अवसर मिल सकते हैं।
संसदों की भूमिका को मजबूत बनाने पर चर्चा
नई दिल्ली के संविधान सदन में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' रखा गया है।सम्मेलन में संस्थागत मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे चार प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है। इसके अतिरिक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं
ओम बिरला ने भी वैश्विक सहयोग का किया आह्वान
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।उन्होंने सदस्य देशों की संसदों से संवाद को ठोस नीतिगत परिणामों में बदलने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि संसदीय संस्थाएं देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने का अवसर
12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय संसदीय संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही है।ब्राजील के सीनेटर इराजा सिल्वेस्ट्रे फिल्हो का वैश्विक व्यवस्था को आकार देने संबंधी संदेश भी इसी व्यापक चर्चा से जुड़ा है। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से वैश्विक शासन व्यवस्था, समावेशी विकास और संसदीय सहयोग पर साझा दृष्टिकोण विकसित होने की उम्मीद है।ब्रिक्स संसदीय फोरम का समापन 27 अक्टूबर को होगा। इसके बाद सदस्य देशों के बीच सहयोग और सम्मेलन में सामने आए प्रस्तावों की आगे की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।