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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सदस्य देशों के बीच आपसी सहमति बनने की उम्मीद जताई है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत करते हुए थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मंगलवार को सम्मेलन के समापन तक सभी भागीदार देशों के सांसद एक संयुक्त घोषणा पर सहमत हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है।
संयुक्त घोषणा को लेकर शशि थरूर ने जताई उम्मीद
शशि थरूर ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने सितंबर में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी संयुक्त घोषणा पर सहमति बनने को लेकर आशंकाएं थीं।हालांकि, सदस्य देशों ने बातचीत के जरिए मतभेद दूर किए और नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया।थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संसदीय मंच में भी इसी तरह सहमति बनेगी और मंगलवार, 27 अक्टूबर को संयुक्त घोषणा जारी की जा सकेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में चर्चा जारी है और अंतिम निर्णय सभी देशों की सहमति पर निर्भर करेगा।
11 सदस्य और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल
भारत की मेजबानी में आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।सम्मेलन का आयोजन 26 और 27 अक्टूबर को संसद परिसर स्थित ऐतिहासिक संविधान सदन में किया जा रहा है।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में रूस, ब्राजील, युगांडा और क्यूबा सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य संसदीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।
संसदीय कूटनीति की भूमिका पर दिया जोर
शशि थरूर ने संसदीय कूटनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल सरकारों के बीच औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहने चाहिए।उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के सांसदों के बीच प्रत्यक्ष संवाद से आपसी समझ बढ़ती है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलता है।थरूर ने पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गए भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का भी उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि विदेश यात्राओं के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय सांसदों से सीधे बातचीत करने को उपयोगी बताया था। उनके अनुसार, संसदीय संवाद औपचारिक राजनयिक बातचीत से अलग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ओम बिरला ने लोकतांत्रिक सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि ब्रिक्स देशों की संसदों को जन-केंद्रित विकास, वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।उन्होंने कहा कि भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधताओं के बावजूद सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।सम्मेलन में संस्थागत मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे चार प्रमुख विषयों पर चर्चा की जा रही है।ओम बिरला ने संसदीय संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश
ब्रिक्स संसदीय मंच में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।सम्मेलन में डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समावेशी विकास में संसदों की भूमिका पर चर्चा प्रस्तावित है।भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस मंच का उद्देश्य विभिन्न देशों की संसदीय व्यवस्थाओं के अनुभव साझा करना और सहयोग के नए अवसर तलाशना है।
27 अक्टूबर को संयुक्त घोषणा पर रहेगी नजर
ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन मंगलवार, 27 अक्टूबर को होना निर्धारित है। सम्मेलन के अंतिम दिन संयुक्त घोषणा-पत्र जारी होने की संभावना पर विशेष ध्यान रहेगा।शशि थरूर के बयान से स्पष्ट है कि सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि संयुक्त घोषणा का अंतिम स्वरूप और उसमें शामिल किए जाने वाले मुद्दे सभी प्रतिनिधिमंडलों के बीच सहमति बनने के बाद ही स्पष्ट होंगे।यदि सम्मेलन में संयुक्त घोषणा स्वीकार की जाती है, तो यह ब्रिक्स देशों के बीच संसदीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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