शिया नेता मुक्तदा अल-सदर ने बुधवार को इराकी न्यायपालिका से अगले सप्ताह के अंत तक संसद को भंग करने का आह्वान किया।

अल-सदर ने अपने ट्वीट में कहा कि ससंद खुद ही भंग हो जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कई ऐसे गुट हैं जो कोटा (प्रणाली) का पालन करते हैं और ये भ्रष्ट्राचार में भी शामिल हैं और ये लोगों की ससंद को भंग करने की मांग के प्रति उत्तरदायी नहीं होंगे।
जुलाई के आखिरी सप्ताह में, अल-सदर के हजारों समर्थकों ने दूसरी बार बगदाद में संसद भवन पर धावा बोला था और प्रदर्शनकारी विधान मंडल के बाहर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह कदम उनके प्रतिद्वंद्वियों, मुख्य रूप से ईरान समर्थित समन्वय ढांचे के प्रयासों के जवाब में आया था, जिसमें प्रधानमंत्री उम्मीदवारों के साथ सरकार बनाने के लिए अल-सदर अनुमोदन नहीं करता था।
अनादोलु एजेंसी ने बताया कि अल-सदर ने कहा है कि न्यायपालिका के माध्यम से विधानसभा को भंग करने का एक वैकल्पिक तरीका निकाला जा सकता है। उन्होंने न्यायपालिका से संसद को भंग करने का आग्रह किया।
बता दें कि 30 जुलाई को इराकी मौलवी के समर्थकों ने एक हफ्ते में दूसरी बार संसद पर धावा बोला था।

प्रदर्शनकारियों ने फिर से बगदाद में उच्च सुरक्षा वाले ग्रीन जोन का उल्लंघन किया, क्योंकि वे प्रधानमंत्री के लिए ईरान समर्थक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के नामांकन का विरोध कर रहे थे। बता दें कि हाल ही में हुई घटना में भी 120 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इससे पहले भी अल-सदर ने जल्द चुनाव कराने और संसद को भंग करने की मांग की थी। अल-सदर ने बुधवार को नजफ से एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि 'संसद को भंग करें और जल्द चुनाव कराएं।'
अल-सदर ने हाल ही में विधानसभा को भंग करने और नौ महीने पुराने राजनीतिक संकट के बीच जल्द चुनाव कराने का आह्वान किया, जिसके कारण 10 अक्टूबर, 2021 के चुनावों के बाद से सरकार का गठन फिर से रूक गया है।

विशेष रूप से, अल-सदर के गुट ने इराक में अक्टूबर 2021 के चुनाव में 73 सीटें जीतीं थी, जिससे यह 329 सीटों वाली संसद में सबसे बड़ा गुट बन गया, लेकिन वोट के बाद से नई सरकार बनाने की बातचीत रुक गई है और राजनीतिक प्रक्रिया के चलते अल-सदर ने पद छोड़ दिया। अभी भी नई सरकार के गठन को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
2016 में भी अल-सदर के समर्थकों ने इसी तरह से संसद पर धावा बोला था। तत्कालीन प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में पार्टी से जुड़े मंत्रियों को टेक्नोक्रेट के साथ बदलने की मांग के बाद धरना दिया और राजनीतिक सुधार की मांग की।

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