वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर एक बार फिर नाराजगी जताई है। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवी पिल्लै को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिए जाने की खबर के बीच ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्ध सुलझाए हैं और दो अन्य संघर्षों को समाप्त करने या उनका समाधान निकालने के करीब हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए किए गए उनके कथित प्रयासों के बावजूद उन्हें या अमेरिका को नोबेल शांति पुरस्कार क्यों नहीं मिला।शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने बंधकों की रिहाई, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और विभिन्न देशों के बीच तनाव कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
आठ युद्ध सुलझाने का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों का समाधान कराया है और दो अन्य संघर्षों को समाप्त करने के करीब हैं।उन्होंने अपने कार्यकाल की विदेश नीति संबंधी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए उनके प्रयासों को मान्यता मिलनी चाहिए।ट्रंप ने सवाल उठाया कि इतनी उपलब्धियों के बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार क्यों नहीं दिया गया।हालांकि, उन्होंने जिन आठ युद्धों को सुलझाने का दावा किया है, उनकी पूरी सूची और प्रत्येक संघर्ष में उनकी भूमिका का विस्तृत प्रमाण उपलब्ध बयान में नहीं दिया गया है।इसलिए उनके इस दावे को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के बजाय राष्ट्रपति के अपने आकलन के रूप में देखना आवश्यक है।
बंधकों की रिहाई का भी किया उल्लेख
ट्रंप ने अपने बयान में इजराइली बंधकों की रिहाई को भी अपनी उपलब्धियों में शामिल किया।उन्होंने दावा किया कि उनकी कोशिशों से सभी इजराइली बंधकों की वापसी सुनिश्चित हुई, जिनमें अंतिम 28 जीवित और मृत बंधक भी शामिल थे।इसके अलावा उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों से सैकड़ों बंधकों को रिहा कराकर उनके घर पहुंचाने में भी उनकी भूमिका रही है।हालांकि, इन सभी घटनाओं में ट्रंप की व्यक्तिगत भूमिका और उनके दावों के पूरे दायरे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।ट्रंप ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए उनके प्रयास नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पर्याप्त थे।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किया दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर भी अपनी विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाईं।उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका।ट्रंप ने ईरान को लेकर कठोर शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उसके परमाणु हथियार हासिल करने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता था।उन्होंने रूस-यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों के समाधान की दिशा में प्रयास जारी होने की बात भी कही।हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति और संघर्षों के समाधान से जुड़े उनके दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित उपलब्धि नहीं माना जा सकता।
वेनेजुएला को लेकर भी गिनाईं उपलब्धियां
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में वेनेजुएला का भी उल्लेख किया।उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने वहां एक युद्ध जीता और देश के पूर्व शासक निकोलस मादुरो को पकड़ने में सफलता हासिल की।ट्रंप ने इस घटनाक्रम को अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया।इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।हालांकि, वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिति और अमेरिकी कार्रवाई के परिणामों को लेकर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण मौजूद हैं।
नवी पिल्लै के चयन पर जताई नाराजगी
ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवी पिल्लै को लेकर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की।उन्होंने कहा कि वह पिल्लै के काम के बारे में नहीं जानते और सवाल उठाया कि उनके मुकाबले उन्हें यह सम्मान क्यों दिया गया।ट्रंप ने पिल्लै पर इजराइल के प्रति नकारात्मक रुख रखने का आरोप भी लगाया।हालांकि, उनका यह आरोप व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है, न कि नोबेल समिति का निष्कर्ष।पिल्लै को पुरस्कार देने का निर्णय नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उनके अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और शांति के क्षेत्र में योगदान के आधार पर लिया है।
नवी पिल्लै को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की।समिति ने कहा कि पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत बनाने और युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों तथा नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।पिल्लै दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ कानूनी संघर्ष से जुड़ी रही हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में भी सेवाएं दी हैं।इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में उनकी लंबी भूमिका रही है।नोबेल समिति ने उनके दशकों लंबे कानूनी कार्य और अंतरराष्ट्रीय न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान का प्रमुख आधार बताया।
आठ नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए थे: ट्रंप
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने जिन आठ युद्धों को सुलझाने का दावा किया है, उनमें से प्रत्येक उपलब्धि नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पर्याप्त हो सकती थी।उन्होंने यहां तक कहा कि उनके काम को देखते हुए उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।ट्रंप ने कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, भारत-पाकिस्तान, आर्मेनिया-अजरबैजान और अन्य संघर्षों का उल्लेख किया।हालांकि, कई संघर्षों में उनकी भूमिका और शांति समझौतों के स्थायित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कुछ संघर्ष समाप्त नहीं हुए हैं, जबकि अन्य में कई देशों और पक्षों की भूमिका रही है।
नोबेल समिति के फैसले पर विवाद
ट्रंप ने पुरस्कार नहीं मिलने पर नॉर्वेजियन नोबेल समिति की आलोचना की और उसके फैसले को गलत बताया।उन्होंने दावा किया कि उनकी विदेश नीति ने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने में मदद की है।दूसरी ओर, नोबेल समिति ने पिल्लै के चयन का आधार स्पष्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके योगदान का उल्लेख किया है।नोबेल शांति पुरस्कार का चयन स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है। यह निर्णय अमेरिकी सरकार या नॉर्वे की सरकार द्वारा नहीं लिया जाता।इस तरह 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद ट्रंप की नाराजगी और उनके विदेश नीति संबंधी दावे चर्चा में हैं। वहीं, नवी पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।