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धर्मशाला। तिब्बती आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा ने शनिवार को भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानूनी विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता नवनथम 'नवी' पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की खबर पर बधाई दी। उन्होंने पिल्लै के मानवाधिकारों के क्षेत्र में लंबे योगदान, अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत बनाने के प्रयासों और दुनिया भर में अधिकारों से वंचित लोगों के समर्थन में किए गए कार्यों की सराहना की। दलाई लामा ने पिल्लै को लिखे पत्र में कानून के शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस के महत्व पर भी जोर दिया।दलाई लामा ने अपने बधाई संदेश में कहा कि नवी पिल्लै ने अपना जीवन उन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया है, जिन्हें विभिन्न परिस्थितियों में अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है। उन्होंने मानवाधिकारों के प्रति पिल्लै की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए बेहतर और न्यायपूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए प्रयास जारी रखने की आवश्यकता बताई।तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने अपने पत्र में लिखा, "आपने अपना जीवन दुनिया भर के उन लोगों के लिए समर्पित कर दिया है जिन्हें उनके अधिकार नहीं मिल पाते हैं।"
दलाई लामा ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल व्यक्तिगत प्रयासों का विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत कानूनी संस्थाओं और जवाबदेह व्यवस्थाओं की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने अपने संदेश में कानून के शासन को न्यायपूर्ण समाज की महत्वपूर्ण आधारशिला बताया।दलाई लामा ने अपने पत्र में लिखा, "मेरा लंबे समय से यह मानना रहा है कि कानून के शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस से चलने वाला देश ही अपने लोगों और व्यापक वैश्विक समुदाय की सेवा करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होता है। जहां कानून का शासन नहीं होता, वहां अन्याय और दुख का आना तय है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनके संदेश में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि कानून का शासन केवल न्याय प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक शांति बनाए रखने का भी आधार है।दलाई लामा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में नवी पिल्लै के कार्यकाल को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर पिल्लै के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने चीन से तिब्बत की मूल समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया था।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा, "एक तिब्बती के तौर पर, मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में आपके कार्यकाल के दौरान चीन से तिब्बत के मूल मुद्दों को हल करने का आग्रह करने की आपकी कोशिशों की गहराई से सराहना करता हूं।नवी पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को की थी। समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को इस सम्मान का आधार बताया। पिल्लै ने अपने लंबे कानूनी करियर में युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों और नरसंहार से जुड़े मामलों में न्याय तथा जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए काम किया है।
भारतीय तमिल मूल के परिवार में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में जन्मीं नवी पिल्लै ने रंगभेद के दौर में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने भेदभावपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया। उनके शुरुआती कानूनी कार्यों में नेल्सन मंडेला और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव भी शामिल रहा।पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह रवांडा के लिए स्थापित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष रहीं। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। उन्होंने यौन हिंसा और नरसंहार से संबंधित अपराधों की कानूनी जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में उनके कार्यकाल में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकार उल्लंघनों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया गया। दलाई लामा ने इसी कार्यकाल के दौरान तिब्बत से जुड़े सवालों पर उनके प्रयासों को याद किया।नोबेल समिति ने पिल्लै के चयन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कानून और न्यायिक संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित किया है। समिति के अनुसार, स्थायी शांति के लिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक है जिसमें गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
दलाई लामा ने अपने पत्र के अंत में नवी पिल्लै का नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं के समुदाय में स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि पिल्लै आगे भी दुनिया को बेहतर बनाने के प्रयासों में योगदान देती रहेंगी।दलाई लामा स्वयं वर्ष 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने नवी पिल्लै को भेजे अपने संदेश में मानवाधिकारों, न्याय, स्वतंत्र संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय शांति के महत्व को प्रमुखता दी।इस प्रकार शनिवार को भेजा गया उनका बधाई पत्र न केवल नवी पिल्लै की उपलब्धियों के सम्मान का संदेश था, बल्कि कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।
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