न्यूयॉर्क। भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारतीय चुनाव आयोग के समर्थन में 124 पूर्व आईएएस और भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारियों के सामने आने के बीच पूर्व भारतीय राजनयिक दीपक वोहरा ने देश की संस्थाओं की मजबूती को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अपने 75 वर्षों के जीवन और 37 वर्षों की सिविल सेवा के अनुभव में उन्होंने भारत को इतना मजबूत पहले कभी नहीं देखा। वोहरा ने देश की प्रगति और मजबूती का श्रेय उसकी संस्थाओं, सिविल सेवाओं और सशस्त्र बलों को दिया। न्यूयॉर्क में इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक वोहरा ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी संस्थाओं में निहित है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक और राजनयिक अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने देश और विदेश में विभिन्न व्यवस्थाओं को करीब से देखा है। उनके अनुसार, जिन देशों की संस्थाएं मजबूत होती हैं, वे प्रगति की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
दीपक वोहरा ने कहा, "मैं 75 वर्ष का हूं और इनमें से 37 वर्ष मैंने सिविल सेवक के रूप में बिताए हैं। विदेश में बिताए गए समय को छोड़कर मैंने सिविल सेवक के रूप में काम किया। अपने पूरे जीवन में, जिसमें सिविल सेवा के 37 वर्ष भी शामिल हैं, मैंने भारत को आज जितना मजबूत कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि भारत की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए देश की संस्थागत व्यवस्था को देखना जरूरी है। सिविल सेवा और सशस्त्र बलों जैसी संस्थाओं ने भारत को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, भारतीय सेना का सम्मान और देश की संस्थाओं के प्रति विश्वास राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं।
पूर्व राजनयिक ने पड़ोसी देशों की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के आसपास कुछ देश कमजोर स्थिति में हैं, कुछ आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और कुछ आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी विशेष पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया। वोहरा ने अपने विदेश अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे कई देश देखे हैं, जहां मजबूत संस्थाओं ने विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुसार, किसी देश की प्रगति केवल उसकी आर्थिक या सैन्य क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी संस्थाओं की मजबूती भी महत्वपूर्ण होती है।
भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जारी चर्चाओं के बीच उनका यह बयान सामने आया है। 124 पूर्व आईएएस और आईएफएस अधिकारियों द्वारा चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के समर्थन का मुद्दा भी इसी चर्चा से जुड़ा है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषय है। इस प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची की समीक्षा और आवश्यक संशोधन किए जाते हैं। हालांकि, दीपक वोहरा के उपलब्ध बयान में एसआईआर की किसी विशिष्ट प्रक्रिया, नियम या उससे जुड़े आरोपों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है। उन्होंने मुख्य रूप से भारतीय संस्थाओं की भूमिका और देश की मजबूती पर अपने विचार रखे।
इसी बीच 124 पूर्व आईएएस, आईएफएस और संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों ने नागरिकों के नाम खुला पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि चुनावी धांधली के आरोप विश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। दूसरी ओर, विपक्षी दल मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
 दीपक वोहरा ने अपने बयान में उन लोगों का भी जिक्र किया, जो राजनीतिक हस्तियों के समर्थकों के लिए 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति समर्थन जताने में उन्हें खुशी होती है, जिसे वह भारत के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय शक्ति का उदाहरण मानते हैं। हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने उस व्यक्ति की स्पष्ट पहचान नहीं बताई। पूर्व राजनयिक के इस बयान में राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति सम्मान, सिविल सेवा का अनुभव और भारत की वर्तमान स्थिति प्रमुख विषय रहे। उनका कहना था कि संस्थाओं की मजबूती किसी भी देश की दीर्घकालिक प्रगति के लिए आवश्यक है।
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