बांग्लादेश में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, 155 मौतों का दावा
155 बच्चों की मौत से मचा हड़कंप
ढाका : बांग्लादेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन Ain o Salish Kendra (ASK) के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2026 के बीच विभिन्न तरह की हिंसक घटनाओं में कम से कम 155 बच्चों की हत्या दर्ज की गई। वहीं बांग्लादेश पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जुलाई के बीच 15,717 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। हालांकि इनमें से ज्यादातर बच्चे बाद में मिल गए।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 15,717 बच्चों को अभी भी लापता बताना सही नहीं है। इनमें से 13,679 बच्चों को खोज लिया गया या वे अपने परिवारों के पास वापस लौट आए, जबकि 2,038 बच्चे सितंबर की शुरुआत तक नहीं मिले थे। यानी दर्ज मामलों में करीब 13 प्रतिशत बच्चे उस समय तक लापता थे।
मानवाधिकार संगठन के आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामले भी गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। जनवरी से अगस्त के दौरान 68 बच्चों की शारीरिक हिंसा से मौत दर्ज की गई, जबकि 49 बच्चों की मौत परिवार से जुड़ी हिंसक घटनाओं में हुई। संगठन के अनुसार यौन हिंसा के बाद 26 बच्चों की हत्या के मामले भी दर्ज किए गए। लापता हुए बच्चों से जुड़े मामलों में भी चिंता बढ़ी है। ASK की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक आठ महीनों के दौरान लापता बताए गए कम से कम 36 बच्चों के शव बाद में बरामद हुए। संगठन ने बच्चों के गायब होने और बाद में मृत मिलने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जुलाई के बीच शून्य से नौ वर्ष की उम्र के 474 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इनमें 406 बच्चे मिल गए, जबकि 68 का पता नहीं चल पाया था। वहीं 10 से 17 वर्ष के 15,243 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें 13,273 वापस मिल गए और 1,970 का पता नहीं चला था।
बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर UNICEF भी चिंता जता चुका है। मई 2026 में UNICEF की बांग्लादेश प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने बच्चों और महिलाओं के खिलाफ क्रूर तथा यौन हिंसा की बढ़ती रिपोर्टों के बीच सुरक्षा व्यवस्था, रिपोर्टिंग सिस्टम, बाल-अनुकूल पुलिस और न्याय प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत बताई थी।
इन आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 15,717 का आंकड़ा लापता होने की दर्ज रिपोर्टों का है, वर्तमान में लापता बच्चों की संख्या का नहीं। पुलिस के सत्यापित आंकड़ों में 2,038 बच्चे उस समय तक नहीं मिले थे। इसलिए पूरे 15 हजार से अधिक बच्चों को अभी भी लापता बताना भ्रामक होगा। बांग्लादेश में सामने आए ये आंकड़े बच्चों की सुरक्षा, हिंसा की रोकथाम और लापता बच्चों को तेजी से खोजने की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।