नेपाल की तबाही में बिछड़े अपने घड़ी और टैटू बने आखिरी पहचान
टाई बेल्ट और टैटू से हो रही अपनों की पहचान
काठमांडू: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जिसने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। नदियों और मलबे से लगातार शव बरामद हो रहे हैं। कई शव इतनी खराब स्थिति में हैं कि चेहरे से उनकी पहचान संभव नहीं हो पा रही। ऐसे में किसी की टाई, किसी का टैटू, गहने, कपड़े या शरीर पर मौजूद खास निशान ही परिजनों के लिए पहचान की आखिरी उम्मीद बन गए हैं। बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कई शव घटनास्थल से दर्जनों से लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच गए। त्रिशूली, मर्स्यांगदी और नारायणी जैसी नदियों के किनारे अलग-अलग जिलों से शव बरामद किए गए हैं। अस्पतालों के शवगृहों पर भी भारी दबाव है। कई स्थानों पर सामुदायिक भवनों और पुलिस परिसरों को अस्थायी शवगृह के रूप में इस्तेमाल करना पड़ा है।
बेटे की टाई देखकर पिता ने की पहचान
सबसे भावुक मामलों में पांच वर्षीय प्रिंस तामांग की कहानी सामने आई। नुवाकोट के राज कुमार तामांग ने अपने बेटे को स्कूल भेजा था, लेकिन बाढ़ के बाद वह लापता हो गया। बाद में नेपाल पुलिस की ओर से जारी शवों की तस्वीरें देखते समय एक बच्चे की स्कूल टाई ने उनका ध्यान खींचा। टाई पर स्कूल का नाम लिखा था। गले के हार और कान की बाली जैसे दूसरे निशानों से भी पहचान की पुष्टि में मदद मिली। बच्चे का शव काफी दूर नारायणी नदी क्षेत्र से बरामद हुआ था।
टैटू बना भाई की पहचान का सहारा
भक्तपुर के एक परिवार के लिए टैटू पहचान का महत्वपूर्ण निशान बना। सत्य कृष्ण प्रजापति ने अपने बड़े भाई सत्य सुंदर प्रजापति की पहचान उनके कंधे के पीछे बने टैटू से की। सत्य सुंदर रसुवा में निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में साइट इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। बाढ़ के बाद उनका चेहरा पहचानने योग्य नहीं था, लेकिन शरीर पर बना टैटू परिवार के लिए अहम सुराग साबित हुआ। एक अन्य मामले में हेटौडा के 25 वर्षीय एक्सकेवेटर ऑपरेटर सुमन गोले की पहचान उनके सीने पर बने टैटू से हुई। टैटू में उनकी पत्नी का नाम लिखा था। पानी और चोटों के कारण चेहरा पहचानना संभव नहीं था, लेकिन इसी निशान के आधार पर परिवार उन्हें ढूंढ सका।
कपड़े और गहने बन रहे आखिरी निशान
पोखरा समेत कई स्थानों पर अज्ञात शवों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी पहचान की जानकारी परिजनों को दिखाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जहां चेहरा पहचानने योग्य नहीं बचा है, वहां स्कूल की टाई, टैटू, हार और कान की बालियों जैसे निशानों से शुरुआती पहचान की जा रही है। घड़ी, बेल्ट, जूते और दूसरी निजी वस्तुएं भी फॉरेंसिक प्रक्रिया में सुराग दे सकती हैं।
लेकिन केवल किसी कपड़े या सामान के आधार पर हर मामले में अंतिम पहचान तय नहीं की जा सकती। जहां संदेह है या एक शव पर एक से अधिक परिवार दावा कर रहे हैं, वहां डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। नेपाल के अधिकारियों ने अज्ञात शवों के डीएनए और फॉरेंसिक नमूने सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की है। नेपाल की इस त्रासदी में अब चुनौती केवल लापता लोगों को तलाशने की नहीं, बल्कि बरामद शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने की भी है। जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए अब एक टाई, टैटू, गहना या शरीर का कोई छोटा-सा निशान ही अपने प्रियजन की पहचान और अंतिम विदाई की उम्मीद बन गया है।