नई दिल्ली: अमेरिका और रूस के बीच रिश्तों में एक बार फिर बड़े पर्दे के पीछे हलचल तेज होती दिख रही है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ मंगलवार को मॉस्को पहुंच गए. अमेरिकी मीडिया ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है. रैटक्लिफ रूस में किन अधिकारियों से मिल रहे हैं और बातचीत का एजेंडा क्या है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
इस दौरे को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि नवंबर 2021 में CIA के तत्कालीन प्रमुख विलियम बर्न्स की व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद पहली बार किसी अमेरिकी खुफिया प्रमुख के मॉस्को जाने की खबर सामने आई है. उस मुलाकात के करीब तीन महीने बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था.
सबसे बड़ा सवाल इस दौरे की गोपनीयता को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने पिछले हफ्ते यूक्रेन से कहा था कि वह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और रूस के कुछ उत्तरी इलाकों के आसपास हवाई हमले न करे.
इसकी वजह बताई गई थी कि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी को लेकर विमान रूसी राजधानी जाने वाला है. इस अमेरिकी संदेश की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने इसकी पुष्टि की, जबकि फाइनेंशियल टाइम्स ने सबसे पहले इसकी रिपोर्ट की थी. CIA ने रैटक्लिफ के दौरे पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. वहीं, क्रेमलिन ने भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
इस दौरे का समय भी बेहद अहम है. अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और रूस के ईरान के साथ करीबी रणनीतिक रिश्ते हैं. तेहरान ने यूक्रेन जंग में मॉस्को को ड्रोन मुहैया कराए हैं. वहीं, रूस ने अमेरिका-ईरान संघर्ष का समाधान कराने में मदद की पेशकश की है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा सिर्फ खुफिया बातचीत तक सीमित है या ट्रंप प्रशासन रूस के जरिए ईरान संकट और यूक्रेन जंग को लेकर कोई बड़ा बैकडोर गेम तैयार कर रहा है? फिलहाल इसका जवाब साफ नहीं है, लेकिन मॉस्को में CIA चीफ की मौजूदगी ने दुनिया की नजरें जरूर रूस पर टिका दी हैं.
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