यूयार्क, आइएएनएस। ब्रेन ट्यूमर की रोकथाम की दिशा में विज्ञानियों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने एक ऐसी दवा की पहचान की है, जो सबसे घातक ब्रेन ट्यूमर की वृद्धि को रोक सकती है। मेनिनजिओमा जैसे घातक ब्रेन ट्यमर की रोकथाम के लिए अभी तक कोई दवा स्वीकृत नहीं है। ऐसे घातक ट्यमर के चलते 20 प्रतिशत मामलों में रोगी शारीरिक तौर पर अक्षम हो जाता है या मौत तक हो जाती है।
नेचर जेनेटिक्स जर्नल में छपा शोध
विज्ञानियों की एक टीम ने एबेमेसिक्लिब नामक दवा की पहचान की है। नेचर जेनेटिक्स जर्नल में दवा के बारे में विस्तृत जानकारी छापी गई है। अध्ययन के अनुसार, एबेमेसिक्लिब दवा एक सेल साइकल इंहिबिटर है, जो कोशिका विभाजन चक्र को बाधित करती है। इस तरीके से ट्यूमर की वृद्धि रुक जाती है।
ट्यूमर के विकास को रोकने में प्रभावी
अमेरिका की नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चूहों और फिर कुछ चुनिंदा मरीजों पर इस दवा का परीक्षण किया है। इसके आधार पर उन्होंने दावा किया है कि यह दवा ट्यूमर के विकास को रोकने में प्रभावी है। नार्थवेस्टर्न के असिस्टेंट प्रोफेसर स्टीफेन मेगिल ने कहा, 'हमारे अध्ययन से यह भी पता चला है कि किस रोगी का इलाज इस दवा करना चाहिए। ऐसे रोगियों में ट्यूमर पर यह दवा ज्यादा कारगर हो सकती है।'
ट्विटर व फेसबुक से रहें दूर तो सुधर सकती सेहत
शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में पाया कि ट्विटर, फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से कम से कम एक हफ्ते की दूरी आपकी सेहत में सुधार के साथ-साथ अवसाद व बेचैनी के लक्षणों में कमी ला सकती है। यह अध्ययन 'साइबरसाइकोलाजी, बिहेवियर एंड सोशल नेटवर्किग' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इंटरनेट मीडिया का उपयोग बहुत व्यापक
ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी आफ बाथ के प्रमुख शोधकर्ता जेफ लैंबर्ट के अनुसार, 'हम जानते हैं कि इंटरनेट मीडिया का उपयोग बहुत व्यापक है। इंटरनेट मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस अध्ययन के जरिये हम यह देखना चाहते थे कि क्या इंटरनेट मीडिया से केवल एक हफ्ते दूर रहने से लोगों की मानसिक सेहत को फायदा हो सकता है।'
सकारात्मक प्रभावों की सूचना दी
प्रमुख शोधकर्ता जेफ लैंबर्ट ने कहा, 'हमारे कई प्रतिभागियों ने इंटरनेट मीडिया से दूर रहने के सकारात्मक प्रभावों की सूचना दी। इनमें मन:स्थिति बेहतर व बेचैनी या चिंता कम होने जैसी बातें शामिल थीं। इससे पता चलता है कि इंटरनेट मीडिया से कम समय की दूरी भी सकारात्मक असर कर सकती है।'
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