Islamabad इस्लामाबाद: पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जगह धीरे-धीरे कम हो रही है।
यह बयान वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार मुनिज़ा जहांगीर के लंबे समय से चल रहे टेलीविज़न प्रोग्राम 'स्पॉटलाइट' को हाल ही में बंद किए जाने के बाद आया है।
पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी के बिगड़ने पर चिंता जताते हुए HRCP ने कहा कि "स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए घेरा लगातार कसता जा रहा है।" आयोग ने आगे कहा कि "अब सरकार के लिए यह ज़रूरी है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी की संवैधानिक गारंटी को बनाए रखे और न केवल संपादकीय आज़ादी की रक्षा करे, बल्कि लोगों के सूचना के अधिकार और उनके जीवन पर असर डालने वाले फैसलों पर सवाल उठाने के अधिकार की भी रक्षा करे।"
आयोग ने कहा, "आज उर्दू पर वरिष्ठ पत्रकार मुनिज़ा जहांगीर के लंबे समय से चल रहे टेलीविज़न प्रोग्राम 'स्पॉटलाइट' को हाल ही में हटाए जाने को कोई अलग-थलग घटना नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे मीडिया की आज़ादी पर लगाई जा रही पाबंदियों के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा माना जाना चाहिए।"
मानवाधिकार संस्था ने कहा कि ऐसी घटनाओं ने उन "व्यापक चिंताओं को और बढ़ा दिया है कि जो पत्रकार मुश्किल सवाल पूछते हैं या आलोचनात्मक बहस के लिए जगह बनाते हैं, उन्हें मुख्यधारा के मंचों से बाहर किया जा रहा है।"
स्थानीय मीडिया की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल और जून 2026 के बीच पाकिस्तान में पत्रकारों को मिल रही धमकियों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई। देश भर में ऐसे 22 मामले सामने आए, जिनमें से सबसे ज़्यादा मामले पंजाब प्रांत से थे।
पाकिस्तान के अख़बार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, 'फ्रीडम नेटवर्क' ने मंगलवार को पाकिस्तान में मीडिया और पत्रकारों को मिल रही धमकियों का तिमाही आकलन जारी किया। इस समीक्षा के मुताबिक, साल की दूसरी तिमाही में पंजाब में 15 और खैबर पख्तूनख्वा में पत्रकारों को धमकी दिए जाने के तीन मामले सामने आए।
दूसरी तिमाही में सिंध और बलूचिस्तान में एक-एक मामला सामने आया, जबकि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में अप्रैल-जून के दौरान एक-एक मामला देखा गया।
'फ्रीडम नेटवर्क' की समीक्षा में पत्रकारों के खिलाफ कई तरह के उल्लंघनों का ज़िक्र किया गया है, जिनमें वास्तविक कानूनी कार्रवाई (छह मामले), कानूनी कार्रवाई की धमकी (चार), गिरफ्तारी (तीन), नुकसान पहुंचाने की धमकी (तीन), हत्या की धमकी (दो), चोट पहुंचाने वाला हमला (दो), बिना चोट वाला हमला (दो) और हत्या की कोशिश व अपहरण (हर श्रेणी में एक-एक मामला) शामिल हैं।