नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर उड़ रहे मरीन वन हेलिकॉप्टर और एक यात्री विमान के बीच 4 अगस्त को बेहद कम दूरी रह गई थी। जांच में सामने आया कि रेडियो संपर्क में खराबी के कारण ATC को हेलिकॉप्टर की उड़ान की जरूरी सूचना नहीं मिल सकी। खास बात यह है कि इस तकनीकी समस्या की जानकारी अधिकारियों को घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही थी।
रेडियो खराबी के कारण पैदा हुई स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर घटना की जांच में रेडियो सिस्टम की खराबी को अहम वजह बताया गया है। 4 अगस्त को ट्रम्प को लेकर मरीन वन हेलिकॉप्टर व्हाइट हाउस के पास स्थित द एलिप्स इलाके से उड़ान भर रहा था। इसी दौरान रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी उड़ान भरने की अनुमति मिल गई।
हेलिकॉप्टर और यात्री विमान कुछ समय के लिए एक-दूसरे के काफी करीब आ गए। हालांकि, दोनों विमानों के पायलटों की सतर्कता के कारण स्थिति बिगड़ने से बच गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि हेलिकॉप्टर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच रेडियो संपर्क ठीक से काम नहीं कर रहा था।
एक हफ्ते पहले ही सामने आई थी तकनीकी समस्या
इस घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि रेडियो संचार में आ रही समस्या के बारे में संबंधित अधिकारियों को पहले से जानकारी थी। 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक में बताया गया था कि मरीन वन की उड़ान से लगभग तीन मिनट पहले भेजी जाने वाली जरूरी चेतावनी कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंच रही थी। समस्या सामने आने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था पर भी चर्चा हुई थी।
तय किया गया था कि अगर हेलिकॉप्टर और कंट्रोल टावर के बीच सीधे रेडियो संपर्क में परेशानी आती है, तो किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के माध्यम से उड़ान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। इसके बावजूद 4 अगस्त को यह वैकल्पिक व्यवस्था भी प्रभावी साबित नहीं हुई। घटना वाले दिन मरीन वन के पायलटों ने जॉइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के माध्यम से कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान की सूचना नहीं मिल सकी।
यात्री विमान को मिल गई टेकऑफ की मंजूरी
मरीन वन की उड़ान की जानकारी कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने के बीच रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को टेकऑफ की अनुमति दे दी गई। इसके बाद दोनों विमान एक-दूसरे के करीब आ गए। NTSB के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी लगभग 1.3 किलोमीटर रह गई थी। वहीं, दोनों की ऊंचाई में अंतर भी करीब 250 फीट तक पहुंच गया था।
यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी जारी की। इसके साथ ही मरीन वन के पायलटों ने भी यात्री विमान को देख लिया। पायलटों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए हेलिकॉप्टर को कुछ देर रोक दिया, जिसके बाद दोनों विमान अलग हो गए।
सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने अमेरिकी हवाई क्षेत्र में राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर और यात्री विमानों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, FAA के नियमों के तहत ऐसी स्थिति में विमानों के बीच निर्धारित न्यूनतम दूरी बनाए रखना जरूरी होता है। नियमों के अनुसार, दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना चाहिए। लेकिन इस घटना में दोनों विमानों के बीच दूरी और ऊंचाई का अंतर इन मानकों से कम हो गया था।
खास बात यह रही कि संबंधित अधिकारियों को रेडियो सिस्टम की समस्या के बारे में पहले से पता था। इसके बावजूद राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर की उड़ान और यात्री विमान के टेकऑफ के बीच जरूरी समन्वय नहीं बन सका।
अब रेडियो सिस्टम में किया गया बदलाव
घटना के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। जांच के बाद रेडियो रिसीवर की स्थिति में बदलाव किया गया है। पहले रिसीवर रिहायशी इलाके के पास था। अब इसे रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगाया गया है। इसके बाद सिस्टम का परीक्षण किया गया और रेडियो संपर्क को ठीक पाया गया।
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले रीगन नेशनल एयरपोर्ट के आसपास एक बड़ा विमान हादसा हो चुका है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी।
उस हादसे के बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया था। ऐसे में राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर से जुड़ी यह नई घटना अमेरिकी विमानन सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गई है।
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