जर्मनी में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन बलूचिस्तान के मुद्दे पर उठी आवाज
बर्लिन। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, लोगों को जबरन गायब किए जाने और न्यायिक प्रक्रिया के बिना हत्याओं के विरोध में जर्मनी के हनोवर शहर में विरोध रैली आयोजित की गई। बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM) के नेतृत्व में 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की स्थिति पर ध्यान देने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।बीएनएम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी हनोवर शहर के प्रमुख क्रोपके इलाके में एकत्र हुए। इसके बाद उन्होंने शहर की सड़कों से होते हुए लोअर सैक्सनी राज्य संसद तक मार्च निकाला। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर नारे लगाए और आम नागरिकों के बीच जानकारी वाले पर्चे बांटे।रैली का मुख्य उद्देश्य बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, गैर-न्यायिक हत्याओं और सैन्य अभियानों से जुड़े आरोपों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना था।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप
बलोच नेशनल मूवमेंट ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में लोगों को जबरन हिरासत में लेने, गायब करने और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं करने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।संगठन ने दावा किया कि इन घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।बीएनएम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र को इन मामलों का संज्ञान लेना चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की कि कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जवाबदेही तय की जाए।हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
संसद के बाहर प्रदर्शन, लोगों को बांटे पर्चे
हनोवर में आयोजित रैली क्रोपके इलाके से शुरू हुई और लोअर सैक्सनी की राज्य संसद के बाहर पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर नारेबाजी की।कार्यकर्ताओं ने आम लोगों को पर्चे बांटकर बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया।बीएनएम ने कहा कि रैली का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान की स्थिति को चर्चा में लाना भी था। संगठन ने कथित ज्यादतियों को रोकने के लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की मांग की।
आसिफ बलोच और आकिब बलोच ने किया संबोधित
प्रदर्शन के दौरान बलोच नेशनल मूवमेंट के कार्यकर्ता आसिफ बलोच और आकिब बलोच ने सभा को संबोधित किया। इसके अलावा पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) के प्रतिनिधि सईद मोमंद और फजल मीना खेल भी रैली में शामिल हुए।वक्ताओं ने बलूचिस्तान में कथित मनमानी हिरासत, यातना, नागरिकों की मौत और जबरन गुमशुदगी के मामलों पर चिंता जताई।उन्होंने बलोच और पश्तून समुदायों के बीच एकजुटता तथा सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
अगस्त की घटनाओं की जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मानवाधिकार संगठन पांक की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए अगस्त 2026 में बलूचिस्तान के पंजगुर इलाके में हुई कथित हत्याओं का मुद्दा उठाया।उन्होंने पीर जान, शोएब बलोच, हाफिज मुदस्सिर, वजीर अहमद और जासिम की मौत से संबंधित मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कीवक्ताओं ने सैन्य हवाई हमलों और ड्रोन हमलों में नागरिकों के मारे जाने के आरोपों की जांच कराने पर भी जोर दिया। संगठन ने कहा कि इन घटनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।इन घटनाओं से संबंधित दावे संगठन की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं और इन्हें जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील
बलोच नेशनल मूवमेंट ने रैली के दौरान बलोच लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा करने की मांग दोहराई।संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की कि वे बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने में भूमिका निभाएं।बीएनएम का कहना है कि बलूचिस्तान से जुड़े मुद्दों का समाधान बल प्रयोग के बजाय मानवाधिकारों, न्याय और आत्मनिर्णय के अधिकार के सम्मान के आधार पर किया जाना चाहिएजर्मनी में आयोजित इस प्रदर्शन के जरिए संगठन ने एक बार फिर बलूचिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।