नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के कथित साजिशकर्ताओं में शामिल और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के वरिष्ठ नेता सैफुल्लाह कसूरी ने एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया है। हाल में हुई एक धार्मिक-राजनीतिक सभा में कसूरी ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के पवित्र स्थलों की रक्षा करेगी और इजरायल को “दुनिया के नक्शे से मिटा देगी।” सुरक्षा मामलों से जुड़ी रिपोर्टों में उसके इस भाषण को LeT के लिए समर्थन, फंड और युवाओं की भर्ती बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कसूरी ने यह बयान पिछले सप्ताह आयोजित खत्म-ए-नबुवत कॉन्फ्रेंस में दिया। रिपोर्टों के मुताबिक उसने अपने भाषण में पाकिस्तानी सेना को पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय संघर्षों में सक्रिय शक्ति के तौर पर पेश करने की कोशिश की और इजरायल के खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया।
सैफुल्लाह कसूरी LeT का डिप्टी चीफ बताया जाता है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसे अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में गिनती हैं। हाल में जम्मू की एक विशेष NIA अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था। हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक पहलगाम हमले के बाद से कसूरी पाकिस्तान में सार्वजनिक सभाओं में लगातार दिखाई देता रहा है। LeT समर्थक टेलीग्राम खातों पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में उसे हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों और वर्दीधारी लोगों की मौजूदगी में कार्यक्रमों में हिस्सा लेते देखा गया है। इन्हीं आयोजनों के जरिए वह फंड जुटाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
कसूरी के ताजा बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब पाकिस्तान में LeT, जैश-ए-मोहम्मद और हमास से जुड़े वरिष्ठ लोगों की कथित बैठकों की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक साल में ऐसे कई संपर्क हुए हैं, हालांकि इन बैठकों की पूरी प्रकृति और किसी औपचारिक सहयोग की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
मार्च में भी कसूरी ने कहा था कि पाकिस्तान अब्राहम समझौतों को स्वीकार नहीं करेगा। इसके बाद मई के अंत में लाहौर की एक रैली में उसने पहलगाम हमले के बाद अपनी बढ़ी पहचान का जिक्र किया था। उसकी सार्वजनिक मौजूदगी और भड़काऊ भाषणों को LeT की प्रचार रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का एक पहलू यह भी है कि ऐसे भाषण क्षेत्रीय संघर्षों और धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर चरमपंथी संगठनों के लिए समर्थन पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। LeT लंबे समय से भारत और विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर को लेकर हिंसक गतिविधियों से जुड़ा रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है।
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