भारतीय युवाओं को विदेश में मिलेंगे नए अवसर सुरक्षित रोजगार पर बड़ी चर्चा
नई दिल्ली। विदेशों में रोजगार और बेहतर अवसर तलाशने वाले भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित प्रवासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण पहल की है। भारत और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के बीच शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को वैश्विक प्रवासन, अंतरराष्ट्रीय आवाजाही और भारतीय कामगारों के लिए अवसर बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और IOM की महानिदेशक एमी पोप ने विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रवासन के बदलते रुझानों को समझना और इन परिस्थितियों में भारत के लिए उपलब्ध संभावनाओं का विस्तार करने के तरीकों पर चर्चा करना था। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक आवाजाही और प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित किया।
विदेश मंत्रालय की सचिव और IOM प्रमुख के बीच मुलाकात
विदेश मंत्रालय की सचिव (CPV और OIA) श्रीप्रिया रंगनाथन ने नई दिल्ली में IOM की महानिदेशक एमी पोप से मुलाकात की।विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों अधिकारियों ने वैश्विक प्रवासन और आवाजाही के रुझानों तथा इस क्षेत्र में भारत के अवसरों को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।श्रीप्रिया रंगनाथन विदेश मंत्रालय में कांसुलर, पासपोर्ट, वीजा और प्रवासी भारतीय मामलों से संबंधित जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। ऐसे में यह मुलाकात विदेशों में रहने वाले और रोजगार के लिए जाने वाले भारतीय नागरिकों के हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से भी मिलीं एमी पोप
भारत यात्रा के दौरान IOM की महानिदेशक एमी पोप ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से भी मुलाकात की थी।इस बैठक में श्रमिकों के कौशल को मान्यता देने, नैतिक भर्ती प्रक्रिया को बढ़ावा देने और नियमित श्रम प्रवासन मार्ग विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
भारतीय कामगारों के कौशल को मिलेगी पहचान
बैठक में कौशल की मान्यता का विषय प्रमुख रहा। विदेशों में नौकरी करने वाले कामगारों के लिए उनके प्रशिक्षण, योग्यता और पेशेवर अनुभव की पहचान महत्वपूर्ण होती है।कई बार दूसरे देशों में रोजगार तलाशने वाले श्रमिकों को अपनी योग्यता और कौशल प्रमाणित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।इसी संदर्भ में कौशल की पहचान और मान्यता से संबंधित सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में भारतीय कामगारों के लिए वैध रोजगार अवसरों तक पहुंच बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
सुरक्षित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोर
एमी पोप और श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे के बीच हुई बातचीत में नैतिक भर्ती प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया।नैतिक भर्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों में नौकरी पाने के इच्छुक श्रमिकों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी, शोषण या अनुचित शर्तों का सामना न करना पड़े।पारदर्शी भर्ती व्यवस्था में रोजगार की शर्तों, वेतन, कार्यस्थल और संबंधित कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी होना महत्वपूर्ण है।इस प्रकार की व्यवस्था विकसित करने से विदेश जाने वाले श्रमिकों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रोजगार प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका
भारत दुनिया के प्रमुख श्रमिक और प्रवासी समुदाय वाले देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक विभिन्न देशों में रोजगार, शिक्षा और पेशेवर अवसरों के लिए जाते हैं।ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, कानूनी रोजगार मार्गों और कौशल आधारित अवसरों पर साझा प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है।IOM अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासन से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली संस्था है, जो सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए देशों के साथ सहयोग करती है।
श्रमिकों की सुरक्षा और रोजगार विस्तार पर फोकस
भारत और IOM के बीच हुई बैठकों से स्पष्ट है कि दोनों पक्ष श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवाजाही और नए अवसरों के विषय पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं।इन चर्चाओं में कौशल विकास, भर्ती व्यवस्था और श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे विषयों को महत्व दिया गया है।हालांकि, इन बैठकों के बाद किसी नए औपचारिक समझौते या रोजगार योजना की घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।भारत और IOM के बीच यह संवाद भविष्य में अंतरराष्ट्रीय श्रम सहयोग मजबूत करने और भारतीय कामगारों के लिए सुरक्षित रोजगार संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।