नई दिल्ली : नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा का संकट अभी टला नहीं है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब अगले 72 घंटे बेहद अहम बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मौसम की खराब स्थिति और कमजोर हो चुके पहाड़ी इलाकों के कारण एक और बड़ी तबाही का खतरा मंडरा रहा है।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आया, जिससे सड़कें, पुल और कई महत्वपूर्ण रास्ते नष्ट हो गए। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इस आपदा में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। भारतीय अधिकारियों ने प्रभावित लोगों की मदद और खोज अभियान के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
तीर्थयात्रियों पर टूटा संकट
नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर और अन्य धार्मिक यात्राओं पर गए कई तीर्थयात्री भी इस आपदा की चपेट में आए हैं। रसुवा और सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद कई यात्रियों से संपर्क टूट गया। कई परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाली सेना, सुरक्षाबल और राहत दल अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम, टूटे रास्ते और लगातार खतरे के कारण बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
नई झील टूटने का खतरा
आपदा के बीच वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र में एक और खतरे की चेतावनी दी है। ग्लेशियरों और पहाड़ी झीलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर किसी कमजोर झील का जलस्तर अचानक बढ़ता है या वह टूटती है तो निचले इलाकों में फिर से भारी तबाही मच सकती है। हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और अनियमित मौसम को ऐसी घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन राहत और बचाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भारत ने बढ़ाई मदद
भारत सरकार नेपाल में फंसे नागरिकों की जानकारी जुटाने और सहायता पहुंचाने में जुटी है। विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं ताकि प्रभावित भारतीयों के परिवारों तक जानकारी पहुंचाई जा सके। बचाव अभियान में दोनों देशों की एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। फिलहाल नेपाल में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है और कई परिवार अब भी अपनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। अगले 72 घंटे मौसम, राहत अभियान और संभावित नई आपदा के लिहाज से नेपाल के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।