उत्तर कोरिया का ऐलान: परमाणु हथियार नहीं छोड़ेंगे, किम यो-जोंग ने बातचीत की कोशिशों को बताया बेवकूफी
नई दिल्ली: उत्तर कोरिया ने एक बार फिर साफ किया है कि वह अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने कहा कि परमाणु हथियार देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और उत्तर कोरिया इन्हें अपने पास बनाए रखेगा।
उन्होंने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की कोशिशों को बेवकूफी भरी बात बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई है।
IAEA सम्मेलन के दौरान किम यो-जोंग का बयान
किम यो-जोंग ने गुरुवार को उत्तर कोरिया की परमाणु नीति को लेकर अपना रुख दोहराया। उनका बयान वियना में चल रही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की जनरल कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आया।
इस साल 14 से 18 सितंबर तक वियना में आयोजित इस सम्मेलन में IAEA के 181 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसी दौरान उत्तर कोरिया की ओर से कहा गया कि वह अपनी परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। किम यो-जोंग के मुताबिक इन हथियारों को बनाए रखना उत्तर कोरिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
ट्रम्प ने फिर बातचीत की इच्छा जताई
उत्तर कोरिया की ओर से यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्योंगयांग के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की इच्छा जाहिर की है। ट्रम्प अपने पहले कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं। इन बैठकों में परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दे और दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, इन मुलाकातों के बावजूद परमाणु मुद्दे पर कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका।
तीन बार आमने-सामने मिले ट्रम्प और किम
जून 2018: ट्रम्प और किम जोंग उन की पहली मुलाकात सिंगापुर में हुई थी। यह पहली बार था जब किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के नेता से आमने-सामने मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच परमाणु हथियारों के खतरे को कम करने और आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
फरवरी 2019: दोनों नेताओं की दूसरी बैठक वियतनाम के हनोई में हुई। इस बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों में राहत को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
जून 2019: तीसरी मुलाकात दक्षिण और उत्तर कोरिया की सीमा पर बने डिमिलिटराइज्ड जोन यानी DMZ में हुई। ट्रम्प दक्षिण कोरिया के दौरे पर थे और इसी दौरान उन्होंने किम जोंग उन से मुलाकात की। इस दौरान ट्रम्प ने उत्तर कोरिया की जमीन पर कदम रखा और ऐसा करने वाले पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बने।
हनोई बैठक के बाद आगे नहीं बढ़ी परमाणु वार्ता
2019 में हनोई में हुई बैठक के बाद अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने के बजाय परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
प्योंगयांग ने परमाणु हथियारों को केवल बातचीत के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली ताकत के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इन्हें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का स्थायी हिस्सा बनाया। उत्तर कोरिया ने अपने कानून में भी परमाणु हथियारों को रक्षा नीति का हिस्सा बताया है। यही वजह है कि किम यो-जोंग का ताजा बयान भी उसी नीति को दोहराता हुआ दिखाई देता है। उनका कहना है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार जरूरी हैं और इन्हें छोड़ने की दिशा में वह वापस नहीं जाएगा।
कितने परमाणु हथियार हैं उत्तर कोरिया के पास?
उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं है। अलग-अलग देशों और संस्थानों ने इसकी संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान बताए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अगस्त में दावा किया था कि उत्तर कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार हैं। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया के आकलन में यह संख्या 80 से 120 के बीच बताई गई है।
हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों की पूरी संख्या सार्वजनिक नहीं करता है। ऐसे में उपलब्ध आंकड़े अलग-अलग आकलनों पर आधारित हैं।