इस्लामाबाद : पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान सरकार को नया अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि बलूचिस्तान से पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों को हटाया जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह बलूचिस्तान के मुद्दे पर ध्यान दे और क्षेत्र की स्थिति को लेकर हस्तक्षेप करे।
मीर यार बलोच की ओर से जारी बयान में पाकिस्तान पर आरोप लगाया गया कि बलूचिस्तान में सेना की तैनाती और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का फायदा स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती रही हैं और बलूच अलगाववादी संगठनों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताती हैं।
बलूच नेता ने क्या मांग रखी?
बलूच नेता ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह बलूचिस्तान से सैन्य और सुरक्षा बलों की वापसी की समयसीमा तय करे। उनके अनुसार, क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी खत्म होनी चाहिए और बलूचिस्तान के लोगों को अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह बलूचिस्तान के हालात पर नजर रखे और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को वैश्विक स्तर पर उठाए। उनके बयान में बलूचिस्तान को अलग पहचान देने की मांग भी दोहराई गई है।
पाकिस्तान और बलूच विद्रोह का पुराना विवाद
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। कुछ बलूच संगठन आरोप लगाते हैं कि केंद्र सरकार क्षेत्र के राजनीतिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के साथ न्याय नहीं कर रही है।
वहीं, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बलूचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र समूह विकास परियोजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। पाकिस्तानी सेना समय-समय पर इन संगठनों के खिलाफ अभियान चलाती रही है।
चीन और बलूचिस्तान का मुद्दा
बलूचिस्तान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां अरब सागर के किनारे स्थित ग्वादर बंदरगाह भी है, जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिहाज से अहम माना जाता है।
बलूच विद्रोही संगठन पहले भी चीन से जुड़ी परियोजनाओं और विदेशी नागरिकों को निशाना बना चुके हैं। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि ऐसे हमलों का उद्देश्य क्षेत्र के विकास को रोकना है।
पाकिस्तान की सुरक्षा कार्रवाई जारी
पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में सक्रिय हथियारबंद समूहों के खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाती रही है। हाल के समय में भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और विद्रोही समूहों के बीच मुठभेड़ की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश की अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है।
वहीं, बलूच अलगाववादी समूह सुरक्षा अभियानों को लेकर मानवाधिकारों से जुड़े आरोप लगाते रहे हैं। इन आरोपों और जवाबी दावों के कारण बलूचिस्तान का मुद्दा लंबे समय से विवादों में बना हुआ है।
दुनिया से क्यों की जा रही अपील?
बलूच नेताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बलूचिस्तान के राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वे वैश्विक मंचों पर अपनी मांगों को उठाने की कोशिश करते रहे हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग को व्यापक मान्यता नहीं मिली है। कई देश पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देते हैं और किसी भी अलगाववादी आंदोलन को समर्थन नहीं देते।
बढ़ सकता है राजनीतिक तनाव
बलूचिस्तान का मुद्दा पाकिस्तान के लिए लंबे समय से सुरक्षा और राजनीतिक चुनौती बना हुआ है। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधन, स्थानीय अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं।
मीर यार बलोच के ताजा बयान के बाद पाकिस्तान सरकार और बलूच अलगाववादी समूहों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस अल्टीमेटम पर पाकिस्तान की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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