नेपाल बाढ़ का कहर सुरंगों में फंसे लोगों के लिए ऑक्सीजन और ड्रोन से रेस्क्यू
नेपाल : आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को बचाना है, जो पहाड़ों के अंदर बनी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंस गए हैं। कई परिवारों को अब तक यह भी पता नहीं है कि उनके अपने जिंदा हैं या नहीं। सुरंगों में फंसी करीब 600 जिंदगियों को बचाने के लिए नेपाली सेना, विशेषज्ञ टीमों और अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया। तेज बहाव अपने साथ मलबा, बड़े-बड़े पत्थर और कीचड़ लेकर आया, जिससे कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगें बंद हो गईं। इन सुरंगों में काम कर रहे सैकड़ों मजदूर और कर्मचारी अचानक आई आपदा के बाद लापता हो गए।
सुरंगों में फंसी जिंदगी और बाहर इंतजार करते परिवार
सबसे दर्दनाक स्थिति उन परिवारों की है, जिनके अपने सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं। कई लोगों को अब तक कोई खबर नहीं मिली है। परिवार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनके लोग सुरक्षित किसी हिस्से में फंसे हों और बचाव दल उन्हें बाहर निकाल ले।
बचाव अधिकारियों के अनुसार, कई मजदूर सुरंगों के अंदर मलबे और गाद के बीच फंसे हो सकते हैं। कुछ जगहों पर ऑक्सीजन पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि अंदर मौजूद लोगों के बचने की संभावना बनी रहे।
मलबा हटाना सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल सुरंगों तक पहुंचना है। बाढ़ के पानी ने सुरंगों के रास्तों को मिट्टी और पत्थरों से भर दिया है। कई जगहों पर रास्ता इतना खराब हो चुका है कि बचावकर्मियों को पहले खुद सुरक्षित रास्ता बनाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंगों के अंदर बड़े-बड़े पत्थर और भारी मलबा जमा है, जिससे मशीनों के जरिए रास्ता साफ करना आसान नहीं है। कई स्थानों पर ड्रिलिंग मशीन, भारी उपकरण और विस्फोटकों की मदद ली जा रही है।
ऑक्सीजन और कैमरे से तलाश
फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव दल कई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरंगों में पाइप के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है और कैमरे भेजकर अंदर की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
रेस्क्यू टीमों का लक्ष्य पहले यह पता लगाना है कि सुरंग के अंदर कोई व्यक्ति जीवित है या नहीं। इसके बाद सुरक्षित रास्ता बनाकर उन्हें बाहर निकालने की योजना पर काम किया जा रहा है।
भारत समेत कई देशों की मदद
नेपाल के इस बड़े बचाव अभियान में भारत समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। भारतीय विशेषज्ञ दल सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए तकनीकी सहायता दे रहे हैं। इसके अलावा अन्य देशों के राहत और बचाव विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हैं।
भारत की फॉरेंसिक टीम भी नेपाल पहुंची है, जो बरामद शवों की पहचान में सहायता कर रही है। आपदा के बाद लापता लोगों की पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बिजली परियोजनाओं पर भी पड़ा असर
नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं इस आपदा से प्रभावित हुई हैं। सुरंगों में पानी और मलबा भरने से कई प्रोजेक्ट बंद हो गए हैं। इससे नेपाल के बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ा है।
जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों के फंसने की वजह से यह हादसा केवल मानवीय संकट नहीं बल्कि नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी बड़ा झटका बन गया है।
समय के खिलाफ चल रही रेस
रेस्क्यू टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय है। जितना समय बीत रहा है, उतनी ही अंदर फंसे लोगों की चिंता बढ़ रही है। हालांकि कई बचाव अभियान ऐसे भी रहे हैं, जहां लंबे समय बाद भी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, इसलिए परिवार अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं।
नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर आपदा प्रबंधन कितना जरूरी है।
फिलहाल सुरंगों में फंसी जिंदगियों को बचाने की कोशिश लगातार जारी है। हर गुजरते घंटे के साथ बचाव दल उम्मीद और चुनौती दोनों के बीच जंग लड़ रहे हैं।