New Delhi. नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच यमन से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार, 19 अक्टूबर को यमन के शबवा प्रांत में सरकारी सेना के एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर भीषण मिसाइल हमला किया। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 200 लोग घायल बताए जा रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 18 बताई गई थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़ गया। हमले के समय शिविर में सैनिकों का प्रशिक्षण चल रहा था। हूती विद्रोहियों ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया।
सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दागीं तीन मिसाइलें
जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत में स्थित अल-आलम सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया। हमले के समय बड़ी संख्या में सैनिक और नए रंगरूट प्रशिक्षण गतिविधियों में शामिल थे। इसी दौरान तीन बैलिस्टिक मिसाइलें शिविर पर दागी गईं। अचानक हुए हमले में बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए। मृतकों और घायलों में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जवान शामिल बताए गए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी और चिकित्सा क्षेत्र के चार सूत्रों के हवाले से शुरुआत में कम से कम 18 लोगों की मौत की जानकारी दी थी। बाद की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर 53 होने की जानकारी सामने आई।
करीब 200 लोगों के घायल होने की खबर
हमले में बड़ी संख्या में सैनिक घायल हुए हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार, घायलों की संख्या लगभग 200 बताई गई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले की निंदा की है। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने इसे गंभीर हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई की बात कही है। इस घटना के बाद यमन में पहले से जारी सैन्य तनाव और बढ़ गया है।
सऊदी अरब में भी हूती हमलों से तनाव
यमन के साथ सऊदी अरब भी हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। रविवार को सऊदी अरब के नजरान शहर के एक रिहायशी इलाके में संदिग्ध हूती प्रोजेक्टाइल गिरने से छह नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई। घटना में तीन मकानों और तीन वाहनों को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी दी गई है। सऊदी अधिकारियों ने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने की कोशिशों पर चिंता जताई है।
राष्ट्रपति महल और हवाई अड्डे को भी बनाया निशाना
इससे पहले 15 अक्टूबर को हूती विद्रोहियों ने यमन के अदन स्थित अल-माशिक राष्ट्रपति महल पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया था। इस हमले में पांच लोगों की मौत और 16 अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, यमन के प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य सुरक्षित रहे। अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी हाल के दिनों में निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं से यमन के सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रियाद हवाई अड्डे पर भी हुए कई हमले
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, अक्टूबर के दौरान रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को कई बार निशाना बनाया गया। गठबंधन ने बताया कि इस महीने हवाई अड्डे पर करीब 20 हमले किए गए, जिनमें 17 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हुए। सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर भी हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
मध्य पूर्व में गहराया सैन्य संकट
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। वर्ष 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया। वर्ष 2022 में हुए संघर्ष विराम से कुछ समय के लिए हिंसा कम हुई थी, लेकिन अब फिर सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है। फरवरी 2026 के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा है। यमन में जारी संघर्ष का असर लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। शबवा में हुए ताजा हमले ने एक बार फिर मध्य पूर्व में बढ़ती हिंसा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।