वॉशिंगटन: ईरान ने सात दिन के प्रस्तावित प्लान के छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और सातवें दिन अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वॉशिंगटन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि इसमें शुरुआत में ही प्रतिबंधों से राहत और फ्रीज की गई संपत्ति तक पहुंच की मांग की गई थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अगर अमेरिका टकराव खत्म करे, अपनी नाकेबंदी हटाए, ईरान की संपत्ति जारी करे और देश को तेल बेचने की इजाज़त दे, तो तेहरान इस अहम शिपिंग रास्ते को खोल देगा।
अरागची ने रविवार को NBC के "मीट द प्रेस" कार्यक्रम में कहा, "हमारा प्रस्ताव बहुत साफ है। अगर अमेरिका कुछ खास कदम उठाए तो हम जलडमरूमध्य खोलने के लिए तैयार हैं।"
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारा पैसा और हमारी संपत्ति, जिसे गैर-कानूनी तरीके से फ्रीज किया गया है, उसे जारी किया जाए। हम चाहते हैं कि हम अपना तेल बेच सकें।"
अरागची ने कहा कि ईरान जिन कदमों की मांग कर रहा है, उन्हें चार या पांच दिनों में पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "अगर वे चाहें - अगर वे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते को लेकर गंभीर हैं, तो अब इसकी संभावना है। हमने यह सात दिन का प्लान पेश किया है।"
उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य छठे दिन फिर से खुल जाएगा और अगले दिन एक बड़े समझौते पर बातचीत शुरू होगी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं।
ट्रंप ने कहा, "वे एक ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिसमें वे तुरंत जलडमरूमध्य खोल दें क्योंकि उन्हें बहुत बुरी तरह नुकसान हो रहा है। लेकिन हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा पूरा नियंत्रण है।"
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इस प्रस्ताव के तहत वॉशिंगटन को ठोस बातचीत शुरू होने से पहले ही बड़ी रियायतें देनी पड़तीं।
वाल्ट्ज ने CNN के "स्टेट ऑफ द यूनियन" कार्यक्रम में कहा, "वे शुरुआत में ही सब कुछ मांग रहे थे।"
वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से राहत और अरबों डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति तक पहुंच चाहता था।
उन्होंने कहा, "असल बात यह है कि वे इस वादे के साथ शुरुआत में ही सब कुछ मांग रहे थे कि वे बाद में बातचीत करेंगे।"
वाल्ट्ज ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमला करके पहले हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। तेहरान अमेरिका के इस दावे को नहीं मानता और कहता है कि वॉशिंगटन ने पिछले समझौतों का उल्लंघन किया है। वाल्ट्ज़ ने कहा, "राष्ट्रपति को भरोसा नहीं है कि ईरानी नेक नीयत से आ रहे हैं और हम सच में उनके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए बातचीत कर पाएंगे।"
अरागची ने कहा कि ट्रंप के सार्वजनिक रूप से इनकार करने के बावजूद, ईरान अभी भी मध्यस्थों के ज़रिए आधिकारिक जवाब का इंतज़ार कर रहा है।
उन्होंने कहा, "साथ ही, हम कूटनीति के लिए भी तैयार हैं। लेकिन, अभी एक बहुत वाजिब योजना सामने है। अगर वे बिना किसी वजह के इसे ठुकराते हैं, तो यह उनकी गलती होगी।"
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अलग से CBS के "फेस द नेशन" कार्यक्रम में कहा कि तेहरान पहले के मेमोरेंडम पर आधारित ढांचे के तहत चरणों में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
पेज़ेशकियन ने कहा, "ज़ाहिर है, हम जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करेंगे।"
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए सीमाओं और निरीक्षणों पर बातचीत कर सकता है, लेकिन ईरानी परमाणु साइटों पर हमले के लिए अमेरिका और इज़राइल को ज़िम्मेदार ठहराया।
पेज़ेशकियन ने कहा, "NPT और अन्य मौजूदा ढांचों के दायरे में, इन सभी मुद्दों पर सहमति बन सकती है।"
अरागची ने कहा कि ईरान कूटनीति का रास्ता खुला रखते हुए फिर से सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है।
उन्होंने कहा, "हम युद्ध फिर से शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन साथ ही, हम कूटनीति के लिए भी तैयार हैं। अब यह राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करता है कि वे क्या चुनते हैं।"