नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश म्यांमार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की रात भूकंप के झटके आने की खबर सामने आई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, स्थानीय समय रात 10 बजकर 36 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप के बाद जान-माल के संभावित नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के घायल होने या जान गंवाने की सूचना नहीं मिली है।
म्यांमार भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील देशों में शामिल है। यहां भारतीय और सुंडा प्लेटों के बीच जटिल भूगर्भीय हलचल होती रहती है। इसके कारण देश के कई हिस्सों में समय-समय पर भूकंप आते हैं। शुक्रवार रात आए भूकंप के केंद्र और गहराई का विस्तृत आधिकारिक विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
शुक्रवार रात 10:36 बजे आया भूकंप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात 10 बजकर 36 मिनट पर म्यांमार में 5.2 तीव्रता का भूकंप आया।भारतीय समय के अनुसार यह घटना रात करीब 9 बजकर 36 मिनट की है। म्यांमार का समय भारत से एक घंटा आगे है।भूकंप की तीव्रता मध्यम श्रेणी की मानी जाती है। इस तीव्रता के भूकंप में प्रभावित इलाके के लोगों को झटके महसूस हो सकते हैं।हालांकि, किसी भूकंप से कितना नुकसान होगा, यह केवल उसकी तीव्रता पर निर्भर नहीं करता।भूकंप की गहराई, केंद्र से आबादी की दूरी, जमीन की संरचना और इमारतों की मजबूती भी नुकसान की आशंका को प्रभावित करती है।
किसी के हताहत होने की सूचना नहीं
शुक्रवार रात सामने आई शुरुआती रिपोर्ट में भूकंप के कारण किसी व्यक्ति के घायल होने या मौत होने की सूचना नहीं दी गई है।इसी तरह बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई पुष्ट जानकारी भी सामने नहीं आई है।हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट में नुकसान दर्ज नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रभावित इलाकों का आकलन पूरा हो चुका है।दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में भूकंप से हुए नुकसान की जानकारी सामने आने में समय लग सकता है।प्रशासनिक और भूकंपीय एजेंसियों के आगे के अपडेट के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
दिन में भी दर्ज की गई थी भूकंपीय गतिविधि
म्यांमार में शुक्रवार को रात की खबर से पहले भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज हुई थीं।म्यांमार के मौसम विज्ञान और जल विज्ञान विभाग के अनुसार, 23 अक्टूबर की सुबह स्थानीय समय 5 बजकर 28 मिनट पर 3.5 तीव्रता का हल्का भूकंप आया था।इसका केंद्र थाबेइक्क्यिन से लगभग 12 मील दक्षिण-पूर्व में था।विभाग के अनुसार, यह भूकंप लगभग 14 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया।इससे स्पष्ट होता है कि देश में अलग-अलग समय पर हल्की और मध्यम भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं।हालांकि, सुबह दर्ज भूकंप और रात में रिपोर्ट किए गए 5.2 तीव्रता के भूकंप के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
चार टेक्टोनिक प्लेटों के प्रभाव वाला क्षेत्र
म्यांमार की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील बनाती है।देश भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा टेक्टोनिक प्लेटों से प्रभावित जटिल भूगर्भीय क्षेत्र में स्थित है।पृथ्वी की बाहरी परत कई विशाल प्लेटों में विभाजित है, जो धीरे-धीरे गतिशील रहती हैं।जब इन प्लेटों के बीच दबाव बढ़ता है और संचित ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, तो भूकंप उत्पन्न हो सकता है।म्यांमार में भारतीय प्लेट की गति और आसपास की भूगर्भीय संरचनाएं भूकंपीय गतिविधियों की प्रमुख वजह हैं।इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के प्लेट सीमांत और सक्रिय भ्रंश मौजूद हैं।
सागाइंग फॉल्ट से बना रहता है खतरा
म्यांमार में सागाइंग फॉल्ट प्रमुख सक्रिय भूगर्भीय संरचनाओं में से एक है।यह देश के बड़े हिस्से से होकर गुजरता है और इसके आसपास कई महत्वपूर्ण आबादी वाले क्षेत्र स्थित हैं।सागाइंग फॉल्ट पर भूगर्भीय हलचल के कारण शक्तिशाली भूकंप आने की संभावना बनी रहती है।इसके आसपास स्थित इमारतों और बुनियादी ढांचे की भूकंपरोधी क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।वैज्ञानिकों के अनुसार, सक्रिय फॉल्ट के आसपास भूगर्भीय ऊर्जा के संचित होने और अचानक मुक्त होने से गंभीर
भूकंपीय
घटनाएं हो सकती हैं।हालांकि, किसी विशेष भूकंप को सागाइंग फॉल्ट से जोड़ने के लिए उसके केंद्र और वैज्ञानिक विश्लेषण की आवश्यकता होती है।
मार्च 2025 में आया था विनाशकारी भूकंप
म्यांमार इससे पहले भी बड़े भूकंपों की मार झेल चुका है।28 मार्च 2025 को देश में लगभग 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था।इस घटना से मांडले और सागाइंग सहित कई क्षेत्रों में व्यापक तबाही हुई थी।कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई थीं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।भूकंप के झटके पड़ोसी थाईलैंड तक महसूस किए गए थे।इस आपदा ने म्यांमार में मजबूत निर्माण मानकों, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन राहत व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर किया था।
क्या 5.2 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है?
भूकंप की 5.2 तीव्रता सामान्य तौर पर मध्यम श्रेणी में आती है।इस स्तर के भूकंप में इमारतों के भीतर रखी वस्तुएं हिल सकती हैं और लोगों को स्पष्ट झटके महसूस हो सकते हैं।केंद्र के निकट स्थित कमजोर संरचनाओं में नुकसान की आशंका भी हो सकती है।हालांकि, गहराई अधिक होने या केंद्र आबादी से दूर होने पर सतह पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रह सकता है।इसीलिए किसी भूकंप के खतरे का आकलन करते समय उसकी तीव्रता के साथ गहराई और स्थान की जानकारी आवश्यक होती है।म्यांमार में शुक्रवार रात आए भूकंप की गहराई की पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
क्या भूकंप से सुनामी आ सकती है?
म्यांमार की लंबी समुद्री तटरेखा बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से जुड़ी हुई है।इस वजह से देश के कुछ तटीय इलाकों में समुद्र के भीतर शक्तिशाली भूकंप से उत्पन्न सुनामी का जोखिम भी मौजूद है।हालांकि, हर भूकंप के बाद सुनामी नहीं आती।सुनामी उत्पन्न होने की संभावना मुख्य रूप से समुद्र के भीतर भूकंप की स्थिति, गहराई, फॉल्ट की प्रकृति और समुद्र तल के विस्थापन पर निर्भर करती है।शुक्रवार रात रिपोर्ट किए गए 5.2 तीव्रता के भूकंप के संबंध में फिलहाल किसी सुनामी चेतावनी की पुष्टि नहीं हुई है।इसलिए बिना आधिकारिक जानकारी के सुनामी आने की आशंका को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
भूकंप आने पर क्या करें?
भूकंप के दौरान घबराहट में भागने के बजाय सुरक्षित रहने के उपाय अपनाना जरूरी है।यदि व्यक्ति किसी इमारत के भीतर है, तो मजबूत मेज के नीचे झुककर सिर और गर्दन को सुरक्षित रखना चाहिए।झटकों के दौरान खिड़कियों, भारी अलमारियों और गिर सकने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखना उचित है।लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।यदि व्यक्ति खुले स्थान पर है, तो बिजली के खंभों, इमारतों और पेड़ों से दूर रहना चाहिए।भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश करने से पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
भारत और पड़ोसी देशों के लिए भी महत्वपूर्ण
म्यांमार की सीमा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से लगती है।इसलिए म्यांमार में आने वाले बड़े भूकंपों के झटके कभी-कभी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भी महसूस किए जा सकते हैं।हालांकि, शुक्रवार रात के भूकंप के झटके भारत के किन क्षेत्रों में महसूस किए गए, इसकी कोई पुष्ट जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी एजेंसियां इस पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखती हैं।
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