वॉशिंगटन: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर कर्ज का बोझ ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। देश का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 40 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। बढ़ते सरकारी खर्च, कर्ज पर बढ़ते ब्याज और वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका की आर्थिक स्थिति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कुल सरकारी कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका को रक्षा खर्च, सामाजिक योजनाओं और पुराने कर्ज के ब्याज भुगतान पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
अमेरिका के बढ़ते कर्ज के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सरकार की आमदनी और खर्च के बीच बढ़ता अंतर इसका प्रमुख कारण है। जब सरकारी खर्च राजस्व से ज्यादा हो जाता है तो सरकार को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है।
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। युद्ध और सैन्य गतिविधियों पर होने वाला खर्च, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और महंगाई की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ईरान युद्ध को अमेरिका के बढ़ते कर्ज का अकेला कारण नहीं माना जा सकता।
डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि टैक्स कटौती, सरकारी खर्च और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक नीतियों के कारण वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। वहीं ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि आर्थिक विकास बढ़ाकर और खर्च में कटौती करके कर्ज के असर को नियंत्रित किया जा सकता है।
अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता अब बढ़ता ब्याज खर्च है। कर्ज बढ़ने के साथ सरकार को ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट पर दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था के सामने लंबे समय की चुनौती को दिखाता है। अगर कर्ज बढ़ने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो भविष्य में सरकार को खर्च कम करने या राजस्व बढ़ाने जैसे कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद इतना बड़ा कर्ज वैश्विक बाजारों के लिए भी चिंता का विषय है। डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों और अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर इसका असर दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच सकता है। फिलहाल अमेरिका के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य और रणनीतिक भूमिका बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते कर्ज और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करना है। आने वाले समय में अमेरिकी सरकार की आर्थिक नीतियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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