होर्मुज में हमले का असर कच्चा तेल उछला ब्रेंट 107 डॉलर के पार
कच्चे तेल में तेज उछाल ब्रेंट ने पार किया 107 डॉलर का स्तर
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर ताजा हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। रॉयटर्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 107.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा जबकि WTI 102.32 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। पिछले सप्ताह भी कच्चे तेल में करीब 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। हालिया घटनाक्रम ने व्यापारियों और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल के लिए होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है।
होर्मुज में जहाजों पर हमलों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में होर्मुज के आसपास जहाजों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी हमलों ने समुद्री परिवहन को लेकर जोखिम और बढ़ा दिया है। इससे पहले तनाव के बीच होर्मुज से तेल का प्रवाह सामान्य स्तर की तुलना में काफी कम होने की खबरें सामने आई थीं। तेल व्यापारियों को आशंका है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो मध्य पूर्व से वैश्विक बाजार तक कच्चे तेल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
सऊदी अरब की पाइपलाइन बंद होने से भी दबाव
तेल की कीमतों पर केवल होर्मुज का तनाव ही असर नहीं डाल रहा है। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन भी ड्रोन हमले के बाद बंद हुई है। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को होर्मुज से बचाते हुए लाल सागर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता है। इसके बंद होने से बाजार में चिंता और बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक पाइपलाइन बंद रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है।
बाब अल-मंदेब पर भी बढ़ा खतरा
मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता का एक और कारण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ता तनाव है। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों की रणनीतिक पेरिम द्वीप की ओर बढ़त ने इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बाब अल-मंदेब से दुनिया के करीब 4 से 5 प्रतिशत तेल व्यापार के गुजरने का अनुमान है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। महंगा कच्चा तेल परिवहन और उत्पादन लागत के जरिए महंगाई की चुनौती भी बढ़ा सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर इसका कितना और कब असर पड़ेगा यह सरकारी करों तेल कंपनियों की मूल्य नीति और रुपये की विनिमय दर समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा। फिलहाल तेल बाजार की नजर होर्मुज सऊदी ऊर्जा ढांचे और मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी है। तनाव कम नहीं होने और आपूर्ति मार्ग बाधित रहने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।