नई दिल्ली: नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पांच सूत्रीय पहल पेश कर सदस्य देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्यापार निवेश और बाजार एकीकरण को और मजबूत करने की बात कही है। चीन की इन पहलों को लेकर भारत में सावधानी की जरूरत पर चर्चा हो रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच भारी व्यापार असंतुलन और महत्वपूर्ण तकनीकों तथा सप्लाई चेन को लेकर पहले से चिंताएं मौजूद हैं।
चिनफिंग की पांच पहलों में सबसे प्रमुख ओपन-सोर्स और समावेशी AI पहल है। चीन ने BRICS AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने की पेशकश की है। इसके तहत लार्ज लैंग्वेज मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग AI से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक साझा ओपन इकोसिस्टम बनाने की योजना है। दूसरी पहल व्यापार और निवेश को आसान बनाने से जुड़ी है जिसमें BRICS स्पेशल इकोनॉमिक जोन पार्टनरशिप और डिजिटल पोर्टल का प्रस्ताव शामिल है। चीन अगले साल BRICS सर्विस ट्रेड फोरम आयोजित करने की भी योजना बना रहा है।
चिनफिंग ने BRICS देशों के बीच औद्योगिक और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ एक बड़ा एकीकृत बाजार तैयार करने पर भी जोर दिया। इसी बिंदु को भारत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और चीन के बीच व्यापार पहले ही बड़े पैमाने पर चीन के पक्ष में है। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन ने भारत को करीब 131.6 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर से अधिक रहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि BRICS के भीतर बाजारों को तेजी से जोड़ने की व्यवस्था कहीं भारत में चीनी वस्तुओं की पहुंच और आसान तो नहीं कर देगी। हालांकि यह फिलहाल एक आशंका और नीतिगत चिंता है न कि BRICS में चीनी सामान की बिना रोकटोक एंट्री का कोई घोषित फैसला। भारत अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन और बाजार हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगा। भारत ने चीन के सामने हाई-टेक आयात और भारतीय कंपनियों के लिए चीनी बाजार में मौजूद बाधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाने की तैयारी की थी।
AI के मामले में भी भारत का रुख सहयोग के साथ सुरक्षा पर जोर देने वाला है। BRICS के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में AI को आर्थिक विकास का बड़ा अवसर बताया गया है लेकिन साथ ही सुरक्षित विश्वसनीय समावेशी और भरोसेमंद AI तकनीक विकसित करने तथा संभावित जोखिमों को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' के खतरे का भी जिक्र किया। वहीं चिनफिंग ने चीन के नेतृत्व में BRICS के लिए ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम का प्रस्ताव रखा। इससे साफ है कि BRICS में तकनीकी सहयोग बढ़ने के साथ डेटा सुरक्षा रणनीतिक निर्भरता और महत्वपूर्ण तकनीकों पर नियंत्रण जैसे मुद्दे भारत के लिए अहम बने रहेंगे। इसलिए चिनफिंग का पांच सूत्रीय प्लान BRICS के भीतर आर्थिक और तकनीकी सहयोग का नया रास्ता खोल सकता है लेकिन भारत के लिए इसमें अवसरों के साथ चुनौतियां भी हैं। खासकर चीनी आयात पर निर्भरता व्यापार घाटा AI सुरक्षा और रणनीतिक तकनीक से जुड़े मामलों में नई दिल्ली को अपने हितों की सुरक्षा करते हुए आगे बढ़ना होगा।
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