वॉशिंगटन: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी हमले को लेकर एक नया दावा सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने हमले से पहले चीन से जुड़ी संस्थाओं से अमेरिकी सैन्य बेस की हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। 17 जुलाई 2026 को हुए इस बैलिस्टिक मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी और चार अन्य घायल हो गए थे। हालांकि अमेरिका ने अभी तक चीन की सरकार पर हमले में सीधे शामिल होने का आरोप नहीं लगाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने जॉर्डन के उत्तर-पूर्व में स्थित मुवफ्फक सलती एयर बेस की सैटेलाइट तस्वीरें हमले से पहले और बाद में हासिल की थीं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों का संबंध ईरान की ओर से किए गए हमले से था। अधिकारियों ने हालांकि उन चीनी संस्थाओं या कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं जिन पर ईरान को तस्वीरें उपलब्ध कराने का संदेह है।
सैनिकों के रहने वाले इलाके पर गिरी थीं मिसाइलें
ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने एयर बेस के उस हिस्से को निशाना बनाया था जहां अमेरिकी सैनिक रह रहे थे। हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए जबकि चार अन्य घायल हुए। यह हमला करीब 24 घंटे के भीतर एयर बेस पर हुए तीन मिसाइल हमलों में से एक था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान ने बेस पर मौजूद मानवयुक्त और मानवरहित विमानों से जुड़े क्षेत्रों को भी निशाना बनाया था।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने यह मामला चीनी अधिकारियों के सामने भी उठाया। चीन ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया और अमेरिका से सबूत पेश करने की मांग की। चीन की सरकार पर सीधे तौर पर हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी अभी उन संस्थाओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की है जिन्होंने कथित तौर पर ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें दी थीं।
ट्रंप ने रिपोर्ट को ज्यादा तवज्जो नहीं दी
इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रिपोर्ट को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि अमेरिका और चीन दोनों एक-दूसरे पर नजर रखते हैं। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों को अच्छा बताया। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चा चल रही है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चीनी सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है। सामने आया दावा चीनी संस्थाओं से मिली कथित सैटेलाइट इमेजरी और ईरानी हमले के बीच संबंध को लेकर है। अगर अमेरिकी अधिकारियों के आकलन की पुष्टि होती है तो यह आधुनिक युद्ध में कमर्शियल और हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर नई सुरक्षा चिंताएं पैदा कर सकता है।
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