ब्रासीलिया। ब्राजील में रविवार, 4 अक्टूबर को आम चुनाव के लिए 15.8 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चुनाव में देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के साथ-साथ गवर्नर, सीनेटर, फेडरल डिप्टी तथा राज्य या जिला डिप्टी चुने जाएंगे। राष्ट्रपति पद के चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा एक और कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनका मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो से है।चुनाव को ब्राजील की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। एक तरफ वर्कर्स पार्टी यानी PT के नेता लूला अपनी सरकार के कामकाज और राजनीतिक अनुभव के आधार पर जनता के बीच हैं, वहीं दूसरी ओर लिबरल पार्टी यानी PL के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो अपने पिता जायर बोल्सोनारो की राजनीतिक विरासत के साथ चुनावी मैदान में हैं। दोनों नेताओं के बीच मुकाबला ब्राजील की राजनीति में जारी वैचारिक ध्रुवीकरण को भी सामने लाता है।
15.8 करोड़ से ज्यादा मतदाता डालेंगे वोट
रविवार को होने वाले मतदान में 158 मिलियन से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे। देशभर में मतदान ब्रासीलिया समय के अनुसार सुबह 8 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा। मतदान के दौरान मतदाता अलग-अलग संवैधानिक पदों के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।राष्ट्रपति चुनाव के अलावा गवर्नर, सीनेटर और संसद के निचले सदन यानी फेडरल चैंबर ऑफ डेप्युटीज के सदस्यों का भी चुनाव होगा। इसके साथ ही राज्य या जिला स्तर के प्रतिनिधियों को भी चुना जाएगा। इस वजह से यह चुनाव केवल राष्ट्रपति पद तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आगे की राजनीतिक दिशा तय करने वाला व्यापक चुनाव है।
लूला फिर सत्ता में लौटने की कोशिश में
वर्कर्स पार्टी के नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। लूला ब्राजील की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल रहे हैं और इससे पहले भी राष्ट्रपति पद संभाल चुके हैं। इस चुनाव में उनका लक्ष्य एक बार फिर देश की सत्ता हासिल करना है।लूला का चुनाव अभियान सामाजिक कल्याण, आर्थिक विकास और सरकार की नीतियों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। उनके समर्थक उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और सरकार चलाने के पिछले रिकॉर्ड को प्रमुखता देते हैं। वहीं उनके विरोधी सरकार की नीतियों और देश के सामने मौजूद आर्थिक तथा सामाजिक चुनौतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।इस चुनाव में लूला के सामने एक बार फिर बोल्सोनारो परिवार से जुड़ी राजनीतिक चुनौती दिखाई दे रही है। हालांकि इस बार मुकाबले में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो स्वयं उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने बड़ी चुनौती
लिबरल पार्टी यानी PL ने फ्लावियो बोल्सोनारो को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। फ्लावियो लंबे समय से ब्राजील की राजनीति में सक्रिय हैं और सीनेटर के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनके पिता जायर बोल्सोनारो देश की राजनीति में एक प्रभावशाली और विवादित चेहरा रहे हैं।फ्लावियो के चुनावी अभियान में उनके पिता की राजनीतिक विरासत का असर दिखाई देता है। वह उन मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं जो बोल्सोनारो की राजनीतिक विचारधारा और नीतियों के समर्थक रहे हैं।इस तरह राष्ट्रपति चुनाव में लूला और फ्लावियो के बीच मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि ब्राजील की राजनीति की दो अलग-अलग धाराओं के बीच मुकाबले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पहले दौर से पहले मुकाबला कड़ा
‘ब्राजील 247’ की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के चुनावी सर्वेक्षणों में पहले दौर से पहले लूला को मामूली बढ़त हासिल है। हालांकि संभावित रनऑफ को लेकर किए गए अनुमानों में मुकाबला काफी कड़ा दिखाई दे रहा है।ब्राजील की चुनावी व्यवस्था में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए जरूरी बहुमत प्राप्त करना होता है। यदि पहले दौर में कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो शीर्ष उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मुकाबला हो सकता है।इसी वजह से पहले दौर के मतदान के साथ-साथ संभावित दूसरे दौर की राजनीतिक तस्वीर पर भी सभी की नजरें बनी हुई हैं। मौजूदा अनुमानों में लूला को बढ़त दिखाई देने के बावजूद अंतिम परिणाम मतदाताओं के मतदान और उम्मीदवारों के वास्तविक प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
चुनाव में कई मुद्दे अहम
ब्राजील के इस चुनाव में राष्ट्रपति पद के अलावा आर्थिक स्थिति, रोजगार, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। देश की राजनीति में लंबे समय से वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधाराओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।लूला का राजनीतिक आधार सामाजिक कार्यक्रमों और श्रमिक वर्ग से जुड़े मुद्दों पर मजबूत माना जाता है। दूसरी ओर बोल्सोनारो परिवार का आधार रूढ़िवादी और दक्षिणपंथी मतदाताओं के बीच रहा है। ऐसे में फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने इस समर्थन को राष्ट्रपति चुनाव में बदलने की चुनौती होगी।
राष्ट्रपति के साथ संसद का भी चुनाव
रविवार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्राजील के मतदाता केवल राष्ट्रपति का चुनाव नहीं करेंगे। गवर्नर, सीनेटर, फेडरल डिप्टी और राज्य या जिला डिप्टी के लिए भी मतदान होगा।इन चुनावों का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि राष्ट्रपति के लिए संसद में समर्थन सरकार के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद संसद में किस राजनीतिक दल या गठबंधन की स्थिति मजबूत होती है, इसका असर आने वाले कार्यकाल की नीतियों और कानूनों पर पड़ सकता है।इसलिए राजनीतिक दलों की नजर राष्ट्रपति पद के साथ-साथ विधायी संस्थाओं में अपनी ताकत बढ़ाने पर भी है। राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव भी स्थानीय और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
नतीजों पर दुनिया की भी नजर
ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में यहां होने वाले राष्ट्रपति चुनाव का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता। देश की आर्थिक नीतियां, विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंध भी नई सरकार की दिशा से प्रभावित हो सकते हैं।रविवार को मतदान समाप्त होने के बाद शुरुआती रुझानों से यह संकेत मिल सकता है कि मतदाताओं ने किस राजनीतिक दिशा को प्राथमिकता दी है। यदि किसी उम्मीदवार को निर्णायक बहुमत नहीं मिलता है तो दूसरे दौर की संभावना चुनाव को और लंबा कर सकती है।
फिलहाल लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच मुकाबला ब्राजील की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। लूला अपने अनुभव और राजनीतिक आधार के साथ मैदान में हैं, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो अपने पिता की राजनीतिक विरासत और समर्थक आधार को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।15.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं के मतदान के साथ अब ब्राजील की जनता अपना फैसला सुनाने जा रही है। पहले दौर के परिणाम यह तय करेंगे कि राष्ट्रपति पद की दौड़ का फैसला सीधे होगा या मुकाबला दूसरे दौर तक पहुंचेगा। ऐसे में रविवार का मतदान ब्राजील के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।