वॉशिंगटन। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले नवनिर्वाचित सीनेटर अब्दुल अल-सईद इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। मिशिगन राज्य से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित होने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक सफलता के साथ-साथ उनका भारत से जुड़ा पारिवारिक रिश्ता भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है। अब्दुल अल-सईद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू भारतीय मूल की हैं और उनका परिवार कर्नाटक के तटीय शहर भटकल से संबंध रखता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पुराने पॉडकास्ट वीडियो में अल-सईद ने मजाकिया अंदाज में कहा कि दक्षिण भारतीय परिवार में करीब 20 साल बिताने के बाद वह खुद को अरब से ज्यादा भारतीय महसूस करने लगे हैं।

अब्दुल अल-सईद की यह टिप्पणी अमेरिका और भारत दोनों देशों में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। खासकर भारतीय मूल के समुदायों के बीच उनके इस बयान को लेकर उत्सुकता दिखाई दे रही है।

अल-सईद मिस्र मूल के अमेरिकी राजनेता हैं। उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे। उनका पालन-पोषण अमेरिकी सामाजिक परिवेश में हुआ, लेकिन उन्होंने अपने पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंधों को हमेशा महत्व दिया है।

अब उनकी पत्नी के भारतीय परिवार से जुड़ी बातें सामने आने के बाद उनके जीवन का एक दिलचस्प पहलू लोगों के सामने आया है।

दरअसल, अब्दुल अल-सईद ने एक पॉडकास्ट में अपने विवाह और दक्षिण भारतीय संस्कृति के साथ अपने संबंधों पर खुलकर बातचीत की थी। यह वीडियो पहले रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन अमेरिकी सीनेट चुनाव में उनकी जीत के बाद सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हो गया।

पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि उनकी शादी दक्षिण भारतीय मूल के परिवार में हुई है। लगभग दो दशकों से वह भारतीय रीति-रिवाजों, खानपान और पारिवारिक परंपराओं के संपर्क में हैं।

इसी अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा कि अब वह खुद को अपनी अरब पहचान से भी अधिक भारतीय महसूस करते हैं।

उनकी इस बात को सुनकर पॉडकास्ट में मौजूद अन्य लोग भी मुस्कुराने लगे। अल-सईद ने यह टिप्पणी अपनी भारतीय ससुराल और उससे मिले सांस्कृतिक अनुभवों के संदर्भ में की थी।

अब्दुल अल-सईद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू पेशे से मनोचिकित्सक हैं। उनका जन्म अमेरिका में भारतीय मूल के मुस्लिम परिवार में हुआ था।

सारा के पूर्वज कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित भटकल शहर से संबंध रखते हैं। यह इलाका अपनी समृद्ध व्यापारिक विरासत, समुद्री संपर्क और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है।

सारा जुकाकू का परिवार भटकल के नवायत मुस्लिम समुदाय से जुड़ा हुआ है। इस समुदाय का इतिहास सदियों पुराने समुद्री व्यापार और अरब देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों से जुड़ा रहा है।

इस प्रकार अब्दुल अल-सईद के पारिवारिक जीवन में मिस्र, अमेरिका और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा मेल देखने को मिलता है।

सारा जुकाकू का भारतीय परिवार राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान रखता है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन मैसूर राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे थे और मंत्री पद पर भी कार्य कर चुके थे।

अब्दुल अल-सईद की चुनावी सफलता से कर्नाटक के भटकल में उनके ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों में भी खुशी का माहौल है।

परिवार के सदस्यों ने उनकी जीत को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि अल-सईद की सफलता केवल अमेरिका में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय मूल के परिवार के लिए भी गर्व का अवसर है।

अब्दुल अल-सईद और सारा जुकाकू की मुलाकात मिशिगन विश्वविद्यालय में हुई थी। दोनों विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान मुस्लिम छात्र संगठन से जुड़े हुए थे।

धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हुई और बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। परिवार के अनुसार, अल-सईद ने भारतीय पारिवारिक परंपराओं को करीब से समझने और अपनाने में रुचि दिखाई।

बताया जाता है कि वह अपने ससुराल पक्ष के पारिवारिक आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए भारत भी आ चुके हैं।

उनके भारतीय रिश्तेदारों के अनुसार, अल-सईद परिवार के साथ सहजता से घुलमिल जाते हैं और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान रखते हैं।

एक अन्य पॉडकास्ट बातचीत में उन्होंने अपने विवाह से जुड़ा मजेदार किस्सा भी साझा किया।

अल-सईद ने बताया कि जब उनके एक रिश्तेदार को पता चला कि उन्होंने भारतीय मूल की महिला से शादी की है, तो उन्होंने मजाक में पूछा कि मिस्र में इतने लोग होने के बावजूद उन्होंने भारतीय लड़की को ही जीवनसाथी क्यों चुना।

इस पर अल-सईद ने भी हंसते हुए जवाब दिया कि भारत की आबादी इतनी अधिक है कि सांख्यिकीय दृष्टि से किसी भारतीय से विवाह होना कोई असामान्य बात नहीं है।

उनका यह हल्का-फुल्का किस्सा सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

अब्दुल अल-सईद की राजनीतिक यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही है। वह पेशे से चिकित्सक और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर चुके हैं।

अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आर्थिक असमानता और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाई है।

2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मिशिगन से सीनेट का चुनाव लड़ा।

उनके मुकाबले में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रोजर्स थे, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था।

कड़े चुनावी मुकाबले के बाद अल-सईद ने जीत हासिल की और अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

चुनाव अभियान के दौरान उनकी धार्मिक पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही।

हालांकि, अल-सईद ने अपने चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सुविधाओं, आम लोगों की आर्थिक परेशानियों और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।

उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले मुस्लिम नेता अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हो चुके थे, लेकिन सीनेट के लिए किसी मुस्लिम उम्मीदवार का निर्वाचित होना पहली बार हुआ है।

अब्दुल अल-सईद की उपलब्धि का भारतीय पहलू भी खास है। उनकी पत्नी सारा जुकाकू के जरिए उनका संबंध भारत के एक ऐसे परिवार से जुड़ता है, जिसकी जड़ें कर्नाटक की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत में हैं।

अमेरिकी राजनीति में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले अब्दुल अल-सईद का खुद को अरब से ज्यादा भारतीय महसूस करने वाला बयान इस बात का दिलचस्प उदाहरण है कि विवाह और पारिवारिक रिश्ते किस तरह अलग-अलग देशों तथा संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब ला सकते हैं।

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