तिब्बत कानून को लेकर China पर यूरोपीय देशों का दबाव

Update: 2026-07-12 14:35 GMT

Brussels , ब्रसेल्स : यूरोपीय नेताओं और सांसदों ने चीन के 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ' (जातीय एकता और प्रगति कानून) की आलोचना तेज कर दी है। उनका कहना है कि यह कानून तिब्बतियों और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों की सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को कमजोर करता है।

सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जुलाई को यह कानून लागू होने के बाद से पूरे यूरोप में इसका विरोध बढ़ रहा है। कई पार्टियों के राजनेताओं ने बीजिंग से इस कानून को रद्द करने की मांग की है।

CTA के अनुसार, यह आलोचना 30 अप्रैल, 2026 को यूरोपीय संसद द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद आई है। इस प्रस्ताव में सांसदों ने भारी बहुमत से इस कानून की निंदा की और तर्क दिया कि यह तिब्बतियों, उइगरों, दक्षिणी मंगोलियाई लोगों और अन्य समुदायों के जबरन आत्मसात (assimilation) को बढ़ावा देता है। प्रस्ताव में चीन से इस कानून को वापस लेने की भी मांग की गई।

संसदीय बहस के दौरान, यूरोपीय संसद के कई सदस्यों (MEPs) ने बीजिंग पर आरोप लगाया कि वह जातीय पहचान को कमजोर करने के लिए इस कानून का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकार जैसे मामले पूरी तरह से धार्मिक दायरे में रहने चाहिए और इस प्रक्रिया में चीनी सरकार की किसी भी भूमिका को खारिज कर दिया। अन्य सांसदों ने तर्क दिया कि यह कानून अल्पसंख्यक भाषाओं को प्रतिबंधित करता है, सांस्कृतिक परंपराओं को खत्म करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।

यूरोपीय आयोग का प्रतिनिधित्व करते हुए, कमिश्नर हाजा लाहबिब ने तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूरोपीय संघ की चिंताओं को दोहराया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और तिब्बती संस्कृति व पहचान के संरक्षण पर लगी पाबंदियों का जिक्र किया और 11वें पंचेन लामा के ठिकाने के बारे में पारदर्शिता की मांग की।

CTA की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के दौरान भी इस कानून पर चिंता जताई थी और इसके संभावित 'एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल' (देश की सीमाओं से बाहर के) प्रभावों के बारे में चेतावनी दी थी।

पूरे यूरोप की राष्ट्रीय संसदों से भी विरोध की आवाजें उठी हैं। CTA की रिपोर्ट के मुताबिक, डच, फ्रांसीसी और बेल्जियम के सांसदों ने तिब्बत के मुद्दे पर यूरोप के बीच बेहतर तालमेल की मांग की है। उन्होंने तिब्बत के लिए यूरोपीय संघ के एक विशेष प्रतिनिधि की नियुक्ति और तिब्बती सांस्कृतिक व धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर बीजिंग के साथ अधिक राजनयिक बातचीत का आह्वान किया है।

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