इसायस : अमेरिका के खाड़ी तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे चक्रवात इसायस ने चिंता बढ़ा दी है। आठ अक्टूबर की जानकारी के अनुसार, यह श्रेणी दो का हरिकेन बन गया और इसकी अधिकतम लगातार चलने वाली हवाओं की रफ्तार लगभग 165 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई। फ्लोरिडा के पैनहैंडल क्षेत्र, दक्षिणी अलबामा और दक्षिणी मिसिसिपी में तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्री पानी के तटीय इलाकों में घुसने का खतरा बताया गया है। तूफान के स्थानीय समयानुसार शुक्रवार देर रात या शनिवार की शुरुआत में तट से टकराने का अनुमान है।
इसायस को लेकर सामने आया 165 किलोमीटर प्रति घंटे का आंकड़ा उसके भीतर चलने वाली हवाओं की रफ्तार है। इसे तूफान के आगे बढ़ने की गति नहीं समझना चाहिए। उसी अपडेट में चक्रवात के उत्तर पूर्व की ओर लगभग 22 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ने की जानकारी दी गई थी। इसका केंद्र मिसिसिपी नदी के मुहाने से करीब 415 किलोमीटर दक्षिण में बताया गया था। तूफान की स्थिति और तीव्रता बदल सकती है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों के लिए जारी नवीनतम चेतावनी महत्वपूर्ण है।
चक्रवात की तस्वीरों में दिखाई देने वाली आंख जैसी संरचना को लेकर भी चर्चा है। मौसम विज्ञान में इसे तूफान की ‘आई’ यानी आंख कहा जाता है। यह मजबूत उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में बनने वाला अपेक्षाकृत शांत हिस्सा होता है। यहां नीचे उतरती हवा के कारण बादल कम दिखाई दे सकते हैं। ‘तीसरी आंख’ इसका वैज्ञानिक नाम नहीं है। तस्वीर में केंद्र साफ दिखाई देना तूफान की संरचना का संकेत हो सकता है, लेकिन केवल उससे संभावित नुकसान का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के अनुसार, आंख के चारों ओर मौजूद बादलों और गरज वाले तूफानों का घेरा ‘आईवॉल’ कहलाता है। सबसे तेज हवाएं इसी हिस्से में मिलती हैं। आंख गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए हवा और बारिश कम हो सकती है, लेकिन इसके बाद आईवॉल का दूसरा हिस्सा पहुंचने पर खतरनाक मौसम लौट सकता है। इसलिए अचानक आई शांति को तूफान समाप्त होने का संकेत मानकर सुरक्षित स्थान से बाहर निकलना जोखिम बढ़ा सकता है।
तटीय क्षेत्रों के लिए समुद्री उछाल बड़ी चिंता है। पूर्वानुमान में कुछ प्रभावित इलाकों में पानी पांच से सात फीट तक बढ़ने की चेतावनी दी गई है। इसे केवल सात फीट ऊंची लहर आने की सूचना मानना सही नहीं होगा। ‘स्टॉर्म सर्ज’ समुद्र के जलस्तर में तूफान के कारण होने वाली असामान्य वृद्धि है। तेज हवाएं समुद्री पानी को तट की ओर धकेलती हैं और सामान्य ज्वार के साथ मिलकर निचले क्षेत्रों में खतरनाक बाढ़ पैदा कर सकती हैं।
समुद्री उछाल की ऊंचाई हर स्थान पर समान नहीं होती। तूफान का आकार, उसकी तीव्रता, तट की ओर आने का कोण और समुद्र की गहराई इसका असर तय करते हैं। पानी बढ़ने के ऊपर उठने वाली लहरें नुकसान को और गंभीर बना सकती हैं। ऐसे में किसी एक क्षेत्र का अधिकतम अनुमान पूरे तट पर लागू नहीं किया जा सकता। सबसे ज्यादा जोखिम वाले स्थानों की पहचान स्थानीय चेतावनी और बाढ़ के पूर्वानुमान से होती है।
तूफान के साथ भारी बारिश और कुछ क्षेत्रों में बवंडर का खतरा भी बताया गया है। आठ अक्टूबर के पूर्वानुमान में सामान्यतः तीन से सात इंच बारिश और कुछ स्थानों पर इससे अधिक वर्षा की संभावना जताई गई थी। तटीय बाढ़ के अलावा बारिश का पानी अंदरूनी इलाकों में भी परेशानी पैदा कर सकता है। तूफान तट से टकराने के बाद कमजोर होने लगे, तब भी बारिश और जलभराव का खतरा तत्काल समाप्त नहीं होता।
प्रभावित तटीय समुदायों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। फ्लोरिडा और अलबामा में आपातकाल की घोषणाएं की गई हैं तथा कुछ तटीय क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश मिले हैं। स्कूलों की छुट्टियां और समुद्र तटों पर गतिविधियों में रोक जैसे कदम भी उठाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन की निकासी संबंधी सूचना का पालन करना खास तौर पर उन लोगों के लिए जरूरी है, जो निचले तटीय क्षेत्रों में रह रहे हैं।
इसायस की तीव्रता पर समुद्र और वातावरण की परिस्थितियों का भी असर पड़ रहा है। गर्म समुद्री पानी तूफान को ऊर्जा देता है, जबकि ऊंचाई के साथ हवा की गति और दिशा में बदलाव उसकी संरचना को कमजोर कर सकता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इसायस के मामले में गर्म खाड़ी के पानी और विंड शियर के बीच यही प्रभाव दिखाई दे रहा है। तट तक पहुंचने से पहले ताकत में बदलाव संभव होने के कारण पूर्वानुमानों को लगातार संशोधित किया जा रहा है।
हरिकेन की श्रेणी मुख्य रूप से हवा की रफ्तार बताती है; उसमें बारिश, बाढ़ और समुद्री उछाल के सभी जोखिम शामिल नहीं होते। इसलिए श्रेणी घटने पर भी तटीय खतरे गंभीर रह सकते हैं। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों के लिए तूफान की आंख की तस्वीर से ज्यादा जरूरी स्थानीय मौसम चेतावनी, निकासी आदेश और सुरक्षित ठिकाने की जानकारी है।