New Delhi नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स के नवस्थापित सर्वोच्च राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किए जाने के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की टिप्पणी को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में भारतीय पक्ष ने इस्लामाबाद पर तीखा पलटवार करते हुए ख्वाजा आसिफ के बयान को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।
सीएनएन-न्यूज18 से बातचीत में सरकारी सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को उन मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए, जिनकी उन्हें पर्याप्त समझ नहीं है। सूत्रों ने उनके बयान को बेतुका बताते हुए कहा कि वह ऐसे विषयों पर टिप्पणी कर रहे हैं जो उनकी समझ से परे हैं।
सरकारी सूत्रों ने आगे कहा कि ख्वाजा आसिफ के पास कोई गंभीर और आवश्यक काम नहीं है, इसी कारण वह अपना समय अनावश्यक और आधारहीन टिप्पणियों में लगाते हैं। भारत सरकार के सूत्रों ने उनकी टिप्पणियों को न केवल गैर-जिम्मेदाराना बताया, बल्कि उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें “मानसिक रूप से अस्थिर” तक कहा।
भारत की ओर से यह भी कहा गया कि जिस व्यक्ति के हाथ में पाकिस्तान जैसे देश का रक्षा मंत्रालय है, उसका इस तरह का बयान उस देश की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे बयान न केवल गंभीरता की कमी दिखाते हैं बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक और कूटनीतिक सोच पर भी सवाल उठाते हैं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च सम्मान दिए जाने को लेकर टिप्पणी की थी। उनकी इस टिप्पणी को भारत ने पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अनावश्यक और अस्वीकार्य बताया।
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहे सम्मान कुछ देशों को असहज कर सकते हैं, लेकिन इस पर इस तरह की गैर-जिम्मेदार टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, और ऐसे समय में अनावश्यक बयानबाजी केवल कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।