नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब चीन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या चीन किसी स्तर पर ईरान की मदद कर रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों और हितों को खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई निर्णायक सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन अमेरिका की ओर से कुछ गतिविधियों को लेकर चिंता जरूर जताई गई है।
अमेरिका को आशंका है कि चीन और ईरान के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का इस्तेमाल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। खासतौर पर सैन्य तकनीक, खुफिया जानकारी और आर्थिक सहयोग को लेकर वॉशिंगटन की नजर दोनों देशों के संबंधों पर बनी हुई है।
अमेरिका को क्यों हो रहा शक?
अमेरिका का संदेह मुख्य रूप से चीन और ईरान के बीच बढ़ते सहयोग को लेकर है।
ईरान लंबे समय से अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों में रहा है। दूसरी ओर चीन ईरान का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं।
अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि चीन की कुछ तकनीकी या आर्थिक मदद ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत कर सकती है।
हालांकि चीन लगातार यह दावा करता रहा है कि वह किसी भी देश के खिलाफ सैन्य टकराव को बढ़ावा नहीं देता और वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है।
ईरान और चीन के रिश्ते
चीन और ईरान के संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं।
ईरान के लिए चीन एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, खासकर तेल निर्यात के क्षेत्र में।
वहीं चीन के लिए ईरान पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक देश है।
दोनों देशों ने लंबे समय के सहयोग को लेकर समझौते भी किए हैं।
यही वजह है कि अमेरिका इस रिश्ते को केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी देखता है।
सैन्य मदद को लेकर चिंता
अमेरिका की चिंता का एक बड़ा कारण सैन्य तकनीक और हथियारों से जुड़ा सहयोग है।
अमेरिका को आशंका रहती है कि चीन से मिलने वाली तकनीकी जानकारी या उपकरण ईरान की सैन्य क्षमता बढ़ा सकते हैं।
खासकर ड्रोन, मिसाइल तकनीक और साइबर क्षमताओं को लेकर पश्चिमी देश लंबे समय से सतर्क रहे हैं।
हालांकि किसी भी प्रत्यक्ष सैन्य मदद को लेकर सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।
पश्चिम एशिया में बदलता शक्ति संतुलन
पश्चिम एशिया लंबे समय से अमेरिका की विदेश नीति का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक मौजूदगी बढ़ाई है।
चीन ने कई देशों के साथ संबंध मजबूत किए हैं और खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है।
अमेरिका इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के रूप में देखता है।
अमेरिकी सैनिकों पर खतरे की चिंता
अमेरिकी सैनिक पश्चिम एशिया के कई क्षेत्रों में तैनात हैं।
ईरान समर्थित समूहों और अमेरिका के बीच पहले भी तनाव देखने को मिला है।
अमेरिका को चिंता है कि अगर ईरान को किसी बाहरी शक्ति से तकनीकी या खुफिया सहयोग मिलता है तो अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
इसी कारण अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां ईरान के सहयोगी देशों की गतिविधियों पर नजर रखती हैं।
चीन का रुख क्या है?
चीन हमेशा से कहता रहा है कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
बीजिंग का कहना है कि वह बातचीत और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता है।
चीन ने कई बार अमेरिका की प्रतिबंध नीति की आलोचना की है और ईरान के साथ सामान्य व्यापारिक संबंध बनाए रखने की बात कही है।
अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा का असर
अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।
दोनों देशों के बीच तकनीक, सैन्य प्रभाव और वैश्विक राजनीति को लेकर भी मुकाबला चल रहा है।
ऐसे में ईरान जैसे देशों के साथ चीन के संबंधों को अमेरिका व्यापक रणनीतिक नजरिए से देखता है।
ईरान की रणनीति
ईरान लंबे समय से अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
ऐसे में वह रूस और चीन जैसे देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश करता रहा है।
ईरान का लक्ष्य अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन हासिल करना है।
क्या चीन सीधे अमेरिका के खिलाफ ईरान की मदद कर रहा है?
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि चीन सीधे तौर पर अमेरिकी सैनिकों पर हमलों में ईरान की मदद कर रहा है।
इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण जरूरी होते हैं।
अभी तक जो बातें सामने आई हैं, वे मुख्य रूप से रणनीतिक चिंताओं और खुफिया आकलनों पर आधारित हैं।
वैश्विक राजनीति पर असर
अगर चीन और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा।
इससे अमेरिका, चीन और रूस के बीच वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
दुनिया पहले ही कई क्षेत्रों में तनाव का सामना कर रही है, ऐसे में किसी नए गठजोड़ की संभावना अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
आगे की स्थिति
आने वाले समय में अमेरिका इस मामले पर और जानकारी जुटा सकता है।
ईरान और चीन के बीच संबंधों पर भी वैश्विक निगाहें बनी रहेंगी।
अगर किसी तरह का प्रत्यक्ष सहयोग सामने आता है तो यह अमेरिका-चीन संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर सकता है।