इटली के स्कूलों में चेहरा ढकने पर रोक, बुर्का-नकाब हुआ बैन
मेलोनी कैबिनेट ने मंजूर किया अध्यादेश
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की कैबिनेट ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। नया नियम पूरे देश में सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि स्कूलों और उनसे जुड़ी गतिविधियों में चेहरा ढकने पर रोक लगाता है। सरकार ने इसके साथ कक्षाओं में इतालवी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं रखने वाले विदेशी छात्रों की संख्या से जुड़े नए नियम भी मंजूर किए हैं।
इटली की मंत्रिपरिषद ने 24 सितंबर को स्कूल व्यवस्था से संबंधित इस डिक्री-लॉ को मंजूरी दी। इसके तहत स्कूल की पाठ्यक्रम और पाठ्येतर गतिविधियों के साथ स्कूल-परिवार बैठकों में भी ऐसा पहनावा प्रतिबंधित होगा, जिससे व्यक्ति का चेहरा पहचानना संभव न हो। स्वास्थ्य या सुरक्षा से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान रखा गया है। यह नियम बुर्का और नकाब जैसे पूरी तरह चेहरा ढकने वाले परिधानों पर लागू होगा।
डिक्री के मसौदे के मुताबिक नियम का उल्लंघन करने पर 200 से 1,000 यूरो तक का प्रशासनिक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि नियम का उल्लंघन किसी नाबालिग छात्र द्वारा किया जाता है, तो जुर्माने की जिम्मेदारी अभिभावक पर आ सकती है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ऐसी स्कूल व्यवस्था चाहती है जो एकीकरण को बढ़ावा दे, लेकिन नियमों से समझौता न करे। उनके मुताबिक स्कूलों में विद्यार्थियों का चेहरा खुला रहना चाहिए। सरकार इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और सामाजिक एकीकरण से जोड़ रही है।
इस अध्यादेश का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा कक्षाओं में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या से जुड़ा है। सरकार ने शुरुआती कक्षाओं में उन विद्यार्थियों के लिए 30 प्रतिशत की सीमा तय करने का प्रावधान किया है, जो निर्धारित मानकों के तहत इतालवी शिक्षा व्यवस्था या भाषा से पर्याप्त रूप से जुड़े नहीं हैं। प्राथमिक स्कूलों में इसका आकलन नागरिकता, इटली में जन्म और प्री-स्कूल शिक्षा जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा, जबकि माध्यमिक स्तर के लिए इतालवी शिक्षा प्रणाली में पहले की पढ़ाई को भी देखा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ऐसी कक्षाओं की स्थिति से बचना है, जहां बड़ी संख्या में बच्चों को इतालवी भाषा समझने में कठिनाई हो और इससे पढ़ाई तथा एकीकरण प्रभावित हो। इसके साथ भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
नई व्यवस्था में गंभीर शैक्षणिक एकीकरण की समस्या वाले विदेशी विद्यार्थियों के माता-पिता के लिए भी इतालवी भाषा सीखने से संबंधित प्रावधान हैं। नियमों का पालन नहीं करने पर 200 से 1,000 यूरो तक के जुर्माने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि मेलोनी सरकार के इन कदमों को लेकर इटली में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। सरकार इन्हें भाषा सीखने और सामाजिक एकीकरण को मजबूत करने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं और शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने इन उपायों की आलोचना की है।
डिक्री-लॉ कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रभावी कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश करता है, लेकिन इसे स्थायी कानून बने रहने के लिए इतालवी संसद से निर्धारित अवधि के भीतर मंजूरी की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे सीधे “पूरे इटली में बुर्का-नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध” कहना सही नहीं होगा। फिलहाल मंजूर प्रावधान मुख्य रूप से स्कूलों और स्कूल से संबंधित गतिविधियों पर केंद्रित है।