अमेरिका के बाद यूरोप में छाया पूर्णिया का मखाना जर्मनी जाएगा बड़ा खेप
अमेरिका के बाद जर्मनी में बजेगा पूर्णिया मखाने का डंका
पूर्णिया : बिहार के पूर्णिया का प्रसिद्ध मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहा है। अमेरिका में सफलता के बाद अब यूरोप के बाजार में भी पूर्णिया के रोस्टेड मखाने की मांग बढ़ रही है। इसी कड़ी में जल्द ही दो कंटेनर रोस्टेड मखाना जर्मनी भेजे जाएंगे। यह बिहार के कृषि उत्पादों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में पैदा होने वाला मखाना अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पोषण के लिए देश-विदेश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पहले जहां इसकी मांग मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित थी, वहीं अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और विदेशी उपभोक्ता भी इसे पसंद कर रहे हैं।
मखाना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रोस्टेड मखाना को आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर गुणवत्ता के साथ विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। जर्मनी को भेजे जाने वाले दो कंटेनर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
विदेशी बाजार में बढ़ रही मांग
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच मखाने की मांग तेजी से बढ़ी है। कम कैलोरी, अधिक पोषण और कई स्वास्थ्य लाभों के कारण इसे सुपरफूड के तौर पर भी देखा जा रहा है। यूरोप और अमेरिका में लोग इसे स्नैक्स के रूप में काफी पसंद कर रहे हैं।
पूर्णिया के मखाने की खासियत यह है कि यह पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है और इसकी गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि विदेशी बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
किसानों को मिलेगा फायदा
मखाने के बढ़ते निर्यात से स्थानीय किसानों और कारोबारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है। सरकार और कृषि विभाग भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
मखाना उत्पादन से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बनने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग और सप्लाई चेन से जुड़े कई लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
बिहार की पहचान बन रहा मखाना
बिहार लंबे समय से मखाना उत्पादन के लिए जाना जाता है। खासकर मिथिला और सीमांचल क्षेत्र में इसकी खेती बड़े स्तर पर होती है। अब मखाना केवल स्थानीय बाजार की वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हो रहा है।
अमेरिका में पहुंच बनाने के बाद जर्मनी जैसे यूरोपीय देश में निर्यात होना इस बात का संकेत है कि बिहार के कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में मांग बढ़ रही है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी पूर्णिया के मखाने की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
मखाना उद्योग के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। किसानों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, पैकेजिंग कंपनियों और निर्यात से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मखाना उत्पादन में आधुनिक तकनीक, बेहतर ब्रांडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए तो बिहार का यह उत्पाद वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान बना सकता है।
पूर्णिया के मखाने का जर्मनी तक पहुंचना केवल एक निर्यात सौदा नहीं है, बल्कि यह बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय सफलता की कहानी है। आने वाले समय में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।