माइलेज और परफॉर्मेंस पर Ethanol मिश्रण का प्रभाव

पेट्रोल फ्यूल के मानकों को नॉटिफाई किया है

Update: 2026-06-12 14:00 GMT

Technology प्रौद्योगिकी : भारत सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22, E27 और E30 फ्यूल मानकों को अधिसूचित किया है। इसके साथ ही सरकार ने इन ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में भी छूट देने का निर्णय लिया है, जिससे इनके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

E30 पेट्रोल का अर्थ है ऐसा ईंधन जिसमें 30 प्रतिशत एथेनॉल और 70 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल का मिश्रण होगा। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल पर आयात निर्भरता को कम करना, किसानों को एथेनॉल उत्पादन से लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन को घटाना है। लेकिन इस नए फ्यूल को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश की मौजूदा गाड़ियां इसके लिए तैयार हैं?

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, E30 फ्यूल का इस्तेमाल सभी वाहनों में एक जैसा प्रभाव नहीं डालेगा। नए BS6 और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहन इस प्रकार के मिश्रण के लिए अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल माने जाते हैं। इन इंजनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे एथेनॉल के उच्च मिश्रण को सहन कर सकें।

वहीं, पुराने वाहनों में E30 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ तकनीकी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। एथेनॉल में मौजूद अधिक ऑक्सीजन कंटेंट के कारण इंजन के कुछ हिस्सों पर जंग लगने या फ्यूल सिस्टम में डैमेज की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा माइलेज में भी गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है।

हालांकि सरकार और विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लंबे समय में एथेनॉल ब्लेंडिंग पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। साथ ही यह किसानों के लिए भी एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन रहा है, क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है।

माइलेज के लिहाज से देखा जाए तो जैसे-जैसे एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, वाहनों की ईंधन दक्षता में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि तकनीकी सुधार और इंजन अपग्रेड के जरिए इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुसार ढालना होगा, ताकि E20 से लेकर E30 तक के फ्यूल को आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

कुल मिलाकर, E30 पेट्रोल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए वाहन तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता जागरूकता तीनों का साथ जरूरी होगा।

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