कोलकाता: IIT खड़गपुर के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की प्रोफ़ेसर सुदेशना सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में सीखने से जुड़ी तीन आम गलतफहमियों पर बात की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेक्नोलॉजी तब सबसे अच्छा काम करती है जब वह सीखने की प्रक्रिया को मज़बूत करती है, न कि उसे बदल देती है।
उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी बहुत तेज़ी से बदल रही है, लेकिन जो चीज़ नहीं बदली है, वह है सीखने के लिए की जाने वाली मेहनत। आपको टेक्नोलॉजी के साथ कदम मिलाकर चलना होगा और सीखते रहना होगा।"
इस सुझाव पर कि AI जल्दी से जानकारी या स्पष्टीकरण देता है, प्रोफ़ेसर सरकार ने जानकारी मिलने और असल में समझ विकसित करने के बीच का अंतर बताया।
उन्होंने समझाया, "AI आपको तुरंत जानकारी दे सकता है, और यह सुविधाजनक है। लेकिन जब छात्र किसी समस्या को हल करने की कोशिश में जूझते हैं, असफल होते हैं और फिर से कोशिश करते हैं, तो इससे सच्ची समझ पैदा होती है। तब वे इसे आत्मसात कर सकते हैं, इसे नई स्थितियों में लागू कर सकते हैं, और वह ज्ञान कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो जाता है।"
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीखते समय जूझना असफलता नहीं है।
IIT खड़गपुर द्वारा शेयर किए गए एक X वीडियो में उन्होंने कहा, "अटक जाना असफलता है। समाधान खोजने के लिए जूझना और उसे पाना शॉर्टकट की तुलना में कहीं ज़्यादा सिखाता है। छात्र ऐसी समझ विकसित करते हैं जिसे वे नई स्थितियों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।"
प्रोफ़ेसर सरकार ने इस बात से इनकार किया कि AI ने कड़ी मेहनत को वैकल्पिक बना दिया है। उन्होंने कहा, "AI ने मेहनत कम की है, लेकिन कड़ी मेहनत को वैकल्पिक नहीं बनाया है। आज ज़रूरी यह है कि हम ज्ञान को समझने और उसे अलग-अलग स्थितियों में लागू करने की क्षमता विकसित करें।"
उन्होंने उच्च-स्तरीय सीखने के कौशल और आलोचनात्मक समझ की आवश्यकता पर ज़ोर दिया ताकि AI जो कर सकता है, उससे आगे बढ़कर नई समस्याओं के समाधान विकसित किए जा सकें।
IIT खड़गपुर ने 'नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया' के ज़रिए सीखने वालों के लिए एक चल रही परियोजना की भी घोषणा की।
संस्थान ने कहा, "हर सीखने वाले के लिए, सही समय पर सही मार्गदर्शन बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। फिर भी, बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत, आमने-सामने शैक्षणिक सहायता प्रदान करना एक चुनौती बनी हुई है।"
इसने आगे कहा कि 'फर्मी AI' (Fermi AI) के सहयोग से, यह एक नया AI-आधारित लर्निंग अनुभव विकसित कर रहा है ताकि छात्रों को समस्याओं के बारे में खुद सोचने के लिए मार्गदर्शन, जुड़ाव और प्रोत्साहन मिल सके।
इसने कहा, "किसी समस्या पर अटक गए हैं? आप ज़्यादा देर तक अकेले नहीं रहेंगे।"
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