नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच **स्योर्ड मारिजने** का मानना है कि हालिया एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में टीम का शानदार प्रदर्शन खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने और जीत हासिल करने के अनुभव ने भारतीय खिलाड़ियों को अपनी क्षमता पर भरोसा दिलाया है।भारतीय महिला हॉकी टीम अब **एशियन गेम्स 2026** की तैयारी में जुटी है, जिसका आयोजन जापान के आइची-नागोया में होना है। टीम वर्ल्ड कप में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद नए आत्मविश्वास के साथ एशियाई खेलों में उतरने की तैयारी कर रही है।
वर्ल्ड कप में भारत का शानदार प्रदर्शन
एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया। क्लासिफिकेशन मैच में भारत ने मजबूत टीम जर्मनी को 3-2 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।यह प्रदर्शन भारतीय महिला हॉकी के लिए खास माना जा रहा है, क्योंकि यह वर्ल्ड कप इतिहास में टीम के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक रहा। कोच मारिजने का कहना है कि इस प्रदर्शन ने खिलाड़ियों को यह विश्वास दिया कि वे दुनिया की बड़ी टीमों को चुनौती दे सकती हैं।
बड़े मुकाबलों से बढ़ा भरोसा
मारिजने ने कहा कि खिलाड़ियों को सिर्फ यह बताना काफी नहीं होता कि वे अच्छी टीम हैं, बल्कि उन्हें खुद मैदान पर इसे महसूस करना जरूरी होता है।उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलते हैं और अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास अलग स्तर पर पहुंच जाता है। जर्मनी जैसी मजबूत टीम को हराना खिलाड़ियों के लिए बड़ा अनुभव रहा।कोच के अनुसार, इस तरह की जीत किसी भी टीम के लिए मानसिक मजबूती का काम करती है और खिलाड़ियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
जर्मनी के खिलाफ जीत रही खास
वर्ल्ड कप में जर्मनी को शीर्ष चार टीमों में माना जा रहा था। भारतीय टीम ने क्लासिफिकेशन मुकाबले में जर्मनी को हराकर साबित किया कि वह बड़े मंच पर किसी भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी को टक्कर दे सकती है।भारत ने इस मुकाबले में शानदार खेल दिखाया और दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। इस जीत ने टीम की क्षमता और तैयारी को दर्शाया।
वर्ल्ड कप के बाद तुरंत एशियन गेम्स की तैयारी
कोच मारिजने ने कहा कि वर्ल्ड कप के प्रदर्शन पर पूरी तरह विचार करने के लिए टीम को ज्यादा समय नहीं मिला, क्योंकि एशियन गेम्स की चुनौती सामने है।उन्होंने कहा कि कई बार किसी बड़ी उपलब्धि को समझने और उसका विश्लेषण करने के लिए समय चाहिए होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में टीम को तुरंत अगले लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा।उन्होंने माना कि वर्ल्ड कप में पांचवां स्थान हासिल करना टीम के लिए बेहद सकारात्मक रहा है और इससे खिलाड़ियों को काफी आत्मविश्वास मिला है।
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का लक्ष्य
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए एशियन गेम्स 2026 बेहद महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को **लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक** के लिए सीधे क्वालिफिकेशन का मौका मिलेगा।ऐसे में भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ एक पदक की लड़ाई नहीं बल्कि ओलंपिक टिकट हासिल करने का बड़ा अवसर भी है।
टीम की तैयारियों पर जोर
एशियन गेम्स से पहले भारतीय टीम अपनी रणनीति, फिटनेस और तकनीकी पहलुओं पर काम कर रही है। कोच मारिजने का फोकस खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और बड़े मुकाबलों में दबाव संभालने की क्षमता बढ़ाने पर है।वर्ल्ड कप में मिले अनुभव को टीम अब एशियन गेम्स में इस्तेमाल करना चाहेगी।
युवा खिलाड़ियों को मिला अनुभव
वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने से युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा को समझने का मौका मिला है। इससे टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली है।कोच मारिजने का मानना है कि बड़े मुकाबलों का अनुभव खिलाड़ियों के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है।
भारतीय हॉकी के लिए सकारात्मक संकेत
भारतीय महिला हॉकी पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुधार कर रही है। टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है और अब उसका लक्ष्य बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीतना है।वर्ल्ड कप में पांचवां स्थान हासिल करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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